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इनके दिलों में दिखता है दूसरों का दर्द

Mon, 04 Jan 2016 11:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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बांदा। मौसम की मार से कराह रहे बुंदेलखंड के किसानों की बदहाली को मुद्दा बनाकर चौतरफा शोर मचाने वाले तो खूब हैं पर किसानों की मदद और उनका हौसला बढ़ाने वाले गिने-चुने हैं।
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‘परहित सरिस धर्म नहि भाई’ अर्थात दूसरे के हित से बड़ा कोई धर्म नहीं। इसी भावना से काम करने वाले लोग लाचार किसानों की हरसंभव मदद में जुटे हैं।

इसके लिए न कोई शोरशराबा न नाम के प्रचार का लालच। बस ईमानदारी से जरूरतमंदों की मदद। दूसरी ओर कई राजनीतिक दल किसानों के बुझे चूल्हे और मायूस चेहरों को मुद्दा बनाकर वोटों की फसल काटने के जुगाड़ में हैं।

ऐसे में किसानों की मदद के लिए आगे आए लोगों और उनके तौर तरीकों को यहां उजागर करना जरूरी है, ताकि मायूस किसान और मददगार लोगों के हौसले बढ़ सकें।

बांदा नरैनी क्षेत्र के दर्जनों गांवों में फाकाकशी तक के हालात हैं। तमाम घरों में अक्सर चूल्हे बुझे पड़े हैं। ऐसे में कुछ स्वयंसेवी यहां सक्रिय हुए हैं। ये अनाज बैंक की स्थापना कर जरूरतमंदों को राशन दे रहे हैं।
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अब तक लगभग 135 परिवारों को मदद पहुंचाई जा चुकी है। अनाज बैंक के कार्यकर्ता गांवों में घूमकर पता लगाते हैं कि किस घर में चूल्हा नहीं जल रहा।

घसराउट गांव की दुलरिया के घर में तीन दिन से चूल्हा न जलने की खबर पर अनाज बैंक की कार्यकर्ता राजेश्वरी ने अनाज बैंक से 20 किलो गेहूं और पांच किलो चावल दुलरिया के घर पहुंचा दिए पर किसी को भनक भी नहीं लगी।

नीबी गांव में गरीबी से परेशान रमसइया गांव छोड़ने को तैयार था। उसके घर भी अनाज बैंक से 25 किलो गेहूं और पांच किलो चावल पहुंचाकर पलायन से रोक दिया गया।

चौबे पुरवा में गामा नाम का वृद्ध भूख से चारपाई में लग गया। पड़ोसियों ने यह खबर अनाज बैंक तक पहुंचाई। अनाज बैंक कार्यकर्ता ठाकुरदीन ने 20 किलो गेहूं और पांच किलो चावल उसके घर तत्काल पहुंचाए।

अनाज बैंक के प्रमुख कार्यकर्ता राजाभइया का कहना है कि कई गांवों में अनाज बैंक खोले जा चुके हैं। इनमें अब तक 150 क्विंटल गेहूं और 20 क्विंटल चावल जमा हो चुका है।

तंगहाली से तंग आकर आत्महत्या कर चुके किसानों के परिवारों की खैर खबर लेने वाले भी मौजूद हैं। बघेलाबारी गांव मेें आत्महत्या करने वाले किसान सुरेश यादव की बड़ी बेटी की शादी कराने के बाद स्वयंसेवियों ने मृतक किसान के बेटे विकास यादव को 35 हजार जुटाकर गांव में ही खली और कना की दुकान खुलवा दी है।

इसी तरह रानीपुर गांव में किसान श्रीराम की बेटी गौरा की शादी भी स्वयंसेवियोें ने खर्च जुटाकर कराई है। रानीपुर में भी किसान की बेटी फूला देवी के हाथ पीले कराए और डोली उठवाई। स्वयंसेवी आशीष सागर ने खुद कन्यादान किया।

इसी तरह अन्नदाता की आखत नामक कार्यक्रम आयोजित करके स्वयंसेवियों ने परेशान आधा दर्जन किसान परिवारों को हाल ही में 25-25 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी है।

सहायता पाने वाले किसान परिवारों में रामदेवी (गौरीकलां), बिट्टन निषाद (शाह पाटन), रुखसाना (शेखन पुरवा), बैजू प्रसाद (बरसड़ा) और मवई गांव के देवीदीन वर्मा के दो मासूम बच्चे पूनम और संजय शामिल हैं।

अनाज या आखत आदि के जरिये बदहाल किसानों की मदद कर रहे स्वयंसेवियों ने बुंदेलखंड के किसानों के नाम पर सियासी रोटियां सेंकने वालों को सलाह दी है कि राजनीति चमकाने की बजाय पीड़ित किसानों की मदद को आगे आएं।

 प्रवास सोसायटी के आशीष सागर ने कहा है कि राहुल गांधी के बुंदेलखंड आने पर उनकी सरकार में दिए गए 7266 करोड़ के बुंदेलखंड पैकेज पर उनसे सवाल किए जाएंगे और हिसाब मांगा जाएगा।
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