जिले के विकास कार्यों और शिक्षा व्यवस्था की नब्ज टटोलने आए प्रदेश सरकार के बेसिक शिक्षा सचिव एचएल गुप्ता (आईएएस) को कहीं खामियां नजर नहीं आई। उन्होंने अपने निरीक्षण के लिए स्थल चुनने का काम यहां के अफसरों पर छोड़ दिया। नतीजे में पहले से सजा संवारकर रखे गए गांवों और स्कूलों को दिखाकर अफसरों ने शाबासी हासिल कर ली। समीक्षा बैठक में भी आंकड़ों की बाजीगरी कारगर रही।
मुख्यमंत्री ने हर जिले में विकास कार्यों के निरीक्षण के लिए सचिव स्तर के अफसर नियुक्त किए हैं। बांदा जिला, प्रदेश के बेसिक शिक्षा सचिव के जिम्मे है। सोमवार को वह यहां निरीक्षण पर आए। सर्किट हाउस सभागार में विभिन्न विभागों के अफसरों के साथ विकास कार्यों की समीक्षा बैठक की। अफसरों ने पहले से तैयार किए गए विकास से भरपूर आंकड़ों की झड़ी लगा दी। सचिव को कहीं खामी पकड़ में नहीं आई।
सचिव ने हिदायत दी कि बजट मिल जाने के बाद भी काम शुरू नहीं कराया गया तो दोषी अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी। आंकड़े देखकर सचिव बोले कि बांदा में काफी विकास कार्य कराए जा रहे हैं। सीडीओ कृष्ण त्रिपाठी ने योजनाओं की जानकारी दी। डीएम सुरेश कुमार ने भरोसा दिलाया कि शासन के निर्देशों का पूरी तरह पालन होगा।
सचिव ने लोहिया गांव के निरीक्षण के लिए गांव का चयन करने की जिम्मेदारी यहां के अफसरों पर ही छोड़ दी। सीडीओ श्रीकृष्ण त्रिपाठी और बीएसए सत्य नारायण से स्थल तय करने को कहा। अफसर उन्हें लोहिया गांव पडुई (बड़ोखर ब्लाक) ले गए।
पहले से तैयारियों के बाद भी कक्षा 6 के बच्चे जिले के सबसे बड़े अफसर का पद नाम नहीं बता सके। 7वीं के बच्चों को पढ़ा रहे अनुदेशक से सचिव ने क्षितिज ऊर्जा का अर्थ पूछा तो नहीं बता सके। ग्रामीणों ने सचिव से बालिकाओं के लिए अगल स्कूल की मांग की।
सजे संवरे स्कूल और अफसरों की तैयारी पर खुश सचिव ‘वेरी गुड’ बोलकर यहां से रुखसत हो गए। प्रधानाध्यापक नवाब अली व रमेश पटेल सहित ग्राम प्रधान प्रतिनिधि गोविंद यादव इत्यादि उपस्थित रहे। सचिव ने गुरेह गांव का भी निरीक्षण किया।