बांदा। पुराने स्टॉक की खाद को नई दरों पर बेचकर
किसानों को लगभग 10 लाख का चूना लगा दिया। सूखे से जूझ रहे किसानों को 1166
रुपये की पुरानी दरों वाली डीएपी की एक बोरी नई दर 1199 रुपये में बेची
गई।
30 हजार बोरियों की बिक्री में करीब 9 लाख 90 हजार रुपये
ज्यादा वसूल लिए गए। मामला उजागर होने पर अधिकारियों ने जानकारी न होने की
बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।
इस साल सूखे के चलते जिले में 40 से 50
फीसदी खेतों की ही बुवाई हो पाई है। यह फसल भी किसानों ने काफी जुगाड़ के
बाद बोई है, लेकिन खाद बेचने वाले विभाग किसानों को ठगने से बाज नहीं आए।
पीसीएफ
जिला प्रबंधक परशुराम के मुताबिक 1500 मीट्रिक टन डीएपी पिछले रेट की बफर
गोदाम में बची थी। इसे बिक्री केंद्रों पर भेजकर पुराने रेट 1166 रुपये में
बेचने को कहा था।
दो माह पहले डीएपी का रेट बढ़कर प्रति बोरी 1199
रुपये हो गई। किसानों का कहना है कि सोसायटी व बिक्री केंद्रों पर डीएपी
की एक बोरी 1210 या 1220 रुपये में दी गई।
10-20 रुपये यह कहकर
लिया गया कि यह पल्लेदारी है। प्रगतिशील किसान लाल खां (बरईमानपुर) ने
बताया कि किसान कम पढ़े लिखे हैं। साथ ही खाद के लिए लंबी लाइन लगानी पड़
रही है।
ऐसे में किसान मजबूरन अधिक कीमत अदा कर रहा है। पचोखर के
किसान जगरूप ने बताया कि सोसायटी से उसने 25 बोरी डीएपी 1200 की दर से
खरीदी है।
बिक्री केंद्रों में पुराने रेट की 30 हजार बोरियां
किसानों को नई दर 1199 रुपये में बेची गई। उधर, सहायक निबंधक (सहकारी
समितियां) सुरेश कुमार ने स्वीकार किया कि पुराने स्टाक की डीएपी किसानों
को ज्यादा कीमत में बेची गई है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराकर
कार्रवाई की जाएगी।