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करन हत्याकांड: बांदा में मासूम की हत्या के बाद कुएं में फेंका था शव; अब दो भाइयों सहित तीन दोषियों को उम्रकैद

Fri, 13 Feb 2026 08:53 PM IST
राहुल तिवारी अमर उजाला नेटवर्क, बांदा

सार

बांदा में छह वर्षीय बच्चे के अपहरण व हत्या मामले में अदालत ने तीन दोषियों को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साक्ष्य मिटाने के लिए शव कुएं में फेंका गया था। कोर्ट ने प्रत्येक पर 18 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया, जिसकी आधी राशि पीड़ित मां को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी।

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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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बांदा में छह वर्षीय मासूम के अपहरण और निर्मम हत्या के मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। मासूम बच्चे का अपहरण कर उसकी गला दबाकर हत्या की गई थी। साथ ही साक्ष्य मिटाने के लिए शव को कुएं में फेंका गया था। इस मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट श्रीपाल सिंह की अदालत ने शुक्रवार को दो सगे भाइयों सहित तीन दोषियों को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके अतिरिक्त तीनों दोषियों पर अन्य धाराओं के तहत सजा के साथ 18-18 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

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घटना 12 नवंबर 2020 को कोतवाली नगर निवासी ममता रैकवार ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके मुताबिक ममता जो मजदूरी करके अपने बच्चों का पालन-पोषण करती थी। उसने बताया कि उनका छह वर्षीय बेटा करन उर्फ बाबू 11 नवंबर 2020 को शाम 6 बजे पप्पू माली पुत्र अशोक माली निवासी निम्नीपार के साथ गया था। जिसके बाद से उसका पता नहीं चला। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 364 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली।

विवेचक नंदराम प्रजापति ने पूछताछ के दौरान पप्पू माली को गिरफ्तार किया, जिससे सोनू माली पुत्र अशोक और बाला प्रसाद पुत्र रामकिशोर कुशवाहा निवासी मर्दन नाका के नाम प्रकाश में आए। इनकी निशानदेही पर 13 नवंबर 2020 को राकेश सोनी के बगीचे में स्थित कुएं से करन का शव बरामद हुआ। हत्या का कारण नशे का विवाद बताया गया। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 व 201 के तहत वृद्धि करते हुए विवेचना प्रारंभ की गई। 
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तीनों आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के दौरान 8 अक्टूबर 2021 को तीनों के विरुद्ध आरोप तय किए गए। अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाह पेश किए गए। न्यायालय में उपलब्ध गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर न्यायाधीश ने अपने 36 पृष्ठों के फैसले में सोनू माली, पप्पू माली (दोनों पुत्र अशोक माली) और बालाप्रसाद कुशवाहा को दोषी पाते हुए सजा और जुर्माने से दंडित किया।
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