बांदा। जिला अस्पताल, ट्रॉमा सेंटर और सीएचसी में मरीजों को धुली साफ सुथरी चादरें मिलना तो दूर की बात तकिया तक नसीब नहीं होता है। मरीजों के साथ आने वाले तीमारदार घर से लाए कंबल, चादर का तकिया सिर में लगाए दिखाई पड़ते हैं। मंगलवार को जिला अस्पताल का नजारा अजब-गजब रहा। अस्पताल के मेन वार्ड, इमरजेंसी, पुरुष व महिला में किन्ही बेड में तकिया तो लगे मिले, पर अधिकांश बेडों में तकिया नहीं मिले। मंगलवार के दिन नारंगी रंग के चादर बिछाए जाते हैं। मौके पर अंदर के वार्ड में नारंगी चादर मिले, लेकिन आई वार्ड में पीले रंग के चादर बिछे दिखाई दिए। इसी तरह से ट्रॉमा सेंटर में फटे बेड में बिना चादर के मरीज लेटे मिले। पेश से चादर व तकिया पर की गई पड़ताल...
103 बेड के जिला अस्पताल, 29 बेड के ट्रॉमा सेंटर व 30 बेडों की आठ सीएचसी में तकियों का भी बुरा हाल है। यहां किसी वार्ड में बिछे बेडों में तकिया नहीं मिली। कुछ बेडों में नीले रंग की तकिया लगी थीं, जबकि ज्यादातर बेडों से तकिया नदारद था। मरीज अपने-अपने घरों से लाए गए कंबल और चादरों को सिरहाने रखे मिले। मंगलवार को इमरजेंसी, पुरुष व महिला वार्ड में नारंगी रंग की चादर बिछाई गई थी। जबकि आई वार्ड में पीले रंग की गंदी चादरें बिछी थीं।
जबकि चादरों की धुलाई और सफाई का प्रतिदिन के हिसाब से 40 रुपया व्यय किया जाता है। जिला अस्पताल को लखनऊ की फर्म को प्राइवेट में ठेका मिला हुआ है। जिला अस्पताल में ही चादर धुलाई के लिए लॉड्री है। यहां प्रतिदिन चादर धुलाई का काम किया जाता है। उसके बाद चादरों को स्टोर में सप्लाई किया जाता है।
स्टोर कीपर प्रतिदिन चादरों को स्टाफ नर्स को गिनती कर देते हैं। बिछाने का काम प्राइवेट कर्मी करते हैं लेकिन आलम यह है कि ट्रामा सेंटर में फटे बेडों में ही मरीजों का लिटाया जा रहा है। कमोबेश यही हाल जिले की आठ सीएचसी का भी है। इन सीएचसी में नरैनी में नारंगी रंग की चादरें तो बिछी मिली लेकिन उनमें तकिया नहीं मिले।
रोजाना चादर कलर कोडिंग
सोमवार - सफेद, मंगलवार- नारंगी, बुधवार-हरा, बृहस्पतिवार- पीला, शुक्रवार-नीला, शनिवार- गहरा नीला, रविवार-लाल-भूरा
सीएचसी के किसी बेड में नहीं मिले तकिया
नरैनी। 30 बेड के सीएचसी में किसी भी बेड में तकिया नहीं मिले। मंगलवार को कलर के हिसाब से नारंगी रंग की चादर बिछी मिली। सीएचसी अधीक्षक डाॅ. अजय विश्वकर्मा ने बताया कि सीएचसी में बेड चादर की आपूर्ति जिले से ठेका प्रणाली से होती है। प्रतिदिन धुले चादरों को लेने के निर्देश है। उनका दावा है कि प्रतिदिन धुले चादरों को बिछाया जाता है।
-
वर्जन
प्रतिदिन चादर और तकिया देने का काम स्टाफ कर्मियों का होता है। अस्पताल के सभी बेडों में चादर और तकिया उपलब्ध कराए जाते हैं। चादर धुलाई का ठेका प्राइवेट फर्म के पास है। जिला अस्पताल में ही स्थित लॉड्री में चादरों और तकिया खोल की नियमित धुलाई होती है। बेडों में अगर तकिया नहीं मिले तो वह संबंधित से पूछताछ करेंगे।
- डॉ. के. कुमार सीएमएस, जिला अस्पताल पुरुष, बांदा।
-
वर्जन
-
चादर व तकिया धुलाई का 40 रुपया भुगतान किया जाता है। ठेका प्राइवेट फर्म के नाम है। रोजाना साफ-सुथरे चादरों की सप्लाई सीएचसी में की जाती है। मरीजों को अगर तकिया नहीं मिल रहे तो वह जांच कराएंगे।
डॉ. विजेंद्र सिंह
सीएमओ, बांदा।
-
फोटो- 04 आई वार्ड में बिना चादर के बेड पर लेटा मरीज। संवाद
फोटो- 04 आई वार्ड में बिना चादर के बेड पर लेटा मरीज। संवाद