तीन अरब रुपये से भी ज्यादा खर्च करके बनाई गई राजकीय ऐलोपैथिक मेडिकल कालेज की चमकती-दमकती बिल्डिंग का भव्य उद्घाटन 12 मार्च को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव करेंगे। पर यह बात कम ही लोगाें को पता है कि मेडिकल कालेज का काम फिलहाल रिटायर्ड और कुछ स्थानीय प्राइवेट डाक्टर संभालेंगे। इनकी भी संख्या गिनी-चुनी है। 40 पदों में सिर्फ 25 की तैनाती हुई है।
वर्ष 2008 में तत्कालीन बसपा सरकार में मेडिकल कालेज को मंजूरी देने के साथ ही बजट भी देकर निर्माण शुरू करा दिया गया था। तब इसकी मूल लागत 2 अरब 55 करोड़ 43 लाख रुपये थी। अब यह बढ़कर 6 अरब 49 करोड़ हो गई है।
फिलहाल 3 अरब रुपये से ज्यादा खर्च कर दिए जाने के बाद भी मात्र 73 फीसदी काम हुआ है। ज्यादातर भवनों में अभी काम चल रहा है। इसी बीच मेडिकल कालेज के उद्घाटन की तारीख तय हो गई।
बृहस्पतिवार (12 मार्च) को सीएम अखिलेश यादव इसके उद्घाटन की रस्म अदा करने आ रहे हैं। ऐसे में अधिकांश बाहरी इमारतों को रंगरोगन के साथ तैयार कर दिया गया है।
प्रदेश में डाक्टरों की यूं भी कमी है। दूसरी तरफ बुंदेलखंड जैसे पिछड़े इलाके में अच्छे डाक्टर आने को भी राजी नहीं। ऐसे में प्रदेश सरकार ने फिलहाल 25 डाक्टरों की तैनाती कर दी है। मगर इनमें ज्यादातर सेवानिवृत्त और स्थानीय प्राइवेट डाक्टर हैं। इन सभी ने अपनी ज्वाइनिंग दे दी है। अभी कम से कम 30 डाक्टरों की और जरूरत है। फिलहाल उनकी पूर्ति होने के आसार नहीं है।
शहर की सड़कों और बदहाली का नजारा मुख्यमंत्री से बचाने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था की आड़ में मुख्यमंत्री का हेलीकाप्टर पुलिस लाइन स्थित हैलीपैड मेें उतरने की बजाए सीधे मेडिकल कालेज में उतारने का इंतजाम किया है। वहां तेजी से हैलीपैड बनाया जा रहा है।
इससे अफसरों की काफी परेशानियां बच जाएंगी। जर्जर सड़कों पर सीएम सवाल कर सकते हैं। शहर की बदहाली पर भी कोई नप सकता है। इसका सबसे बढ़िया उपाए यही खोजा गया कि सीएम को शहर के दर्शन ही न कराए जाएं।