गेहूं की फसल में ‘टॉप ड्रेसिंग’ के लिए यूरिया के
लाले हैं। खाद न मिली तो किसानों की लागत भी हाथ नहीं लगेगी। सोमवार को भी
मंडी परिषद स्थित यूपी एग्रो केंद्र पर खाद के लिए किसानों का हुजूम उमड़ा।
तमाम किसान मंडी में ही रात में डेरा डाले रहे। 11 बजे तक काउंटर
नहीं खुला तो किसानों ने हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस और प्रशासनिक
अधिकारियों से कई बार किसानों की नोकझोंक हुई। पुलिस की मौजूदगी में दोपहर
बाद खाद का वितरण शुरू हुआ।
पहले डीएपी और अब यूरिया खाद का संकट
है। सोमवार को मंडी परिषद स्थित यूपी एग्रो केंद्र पर यूरिया खाद 100
मीट्रिक टन उपलब्ध रही, पर पुलिस बिना केंद्र प्रभारी ने 11 बजे तक काउंटर
ही नहीं खोला, जबकि करीब दो सौ से ज्यादा किसानों ने खाद के चक्कर में ठंड
के बीच मंडी परिषद में ही रात बिताई।
सुबह फिर लाइनों में लग गए।
दोपहर में भी काउंटर खुलता नहीं दिखा तो किसानों ने नारे लगाने शुरू कर
दिए। सूचना पर एसडीएम सदर प्रह्लाद सिंह और सीओ सिटी पुलिस बल के साथ
पहुंचे और खाद का वितरण शुरू कराया। दो बजे से खाद का वितरण शुरू और 5 बजे
फिर काउंटर बंद कर दिया गया।
तीन घंटे में करीब डेढ़ सौ किसानों को
एक-एक बोरी खाद दी गई, जबकि खाद के लिए लाइन में दो से तीन हजार किसान थे।
यूपी एग्रो केंद्र प्रभारी नवल किशोर यादव ने बताया कि खाद वितरण में खुद
किसान ही रोड़ा अटका रहे हैं। यदि शांतिपूर्वक लाइन में लगकर खाद लें तो
किसी को निराश न होना पड़े। यूरिया पर्याप्त है, सभी किसानों को मिलेगी।