खप्टिहा कलां। प्रदेश सरकार के तमाम प्रयासों के बाद भी अन्ना प्रथा पर रोक नहीं लग पा रही है। गोशालाओं में दो-चार पशुओं को बंद कर लाखों रुपये ठिकाने लगाए जा रहे हैं। जसपुरा विकास खंड में 32 ग्राम पंचायतें आती हैं। इनमें ज्यादातर में स्थायी और अस्थायी गोशाला संचालित हैं, लेकिन गोशालाओं में गिनेचुने पशु ही बंद हैं।
कागजों में सैकड़ों पशुओं का संरक्षण दिखाकर भरण पोषण के नाम पर लाखों रुपये बंदरबांट किया जा रहा है। ब्लाक मुख्यालय में सैकड़ों की संख्या में अन्ना पशु घूम रहे हैं। सड़कों में झुंड से दुर्घटनाएं हो रही हैं। अन्ना मवेशी भी हादसे का शिकार हो रहे हैं। आए दिन पशुओं को बचाने में वाहन चालक दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। यहां तक की ब्लाक कार्यालय भी अन्ना मवेशियों का अड्डा बना हुआ है। यहां दस-पंद्रह मवेशी बैठे रहते हैं। बीडीओ सप्ताह में एक या दो दिन कार्यालय आते हैं। उनकी गैरमौजूदगी में कर्मचारी भी नदारद रहते हैं। इस बाबत सीडीओ हरिश्चंद्र वर्मा का कहना है कि सभी बीडीओ को निर्देश दिए गए कि अन्ना मवेशियों को गोशालाओं में संरक्षित किया जाए। बरसात के पूर्व छाया की व्यवस्था की जाए। (संवाद)