पखवारे भर से बिजली-पानी का संकट झेल रहे कृषि
विश्वविद्यालय के छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। छात्रों ने कक्षाओं का
बहिष्कार कर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए।
उत्तेजित
छात्रों को शांत करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। दो दिन के अंदर व्यवस्था
दुरुस्त कराने के आश्वासन पर छात्रों ने आंदोलन खत्म किया।
विश्वविद्यालय
के दो छात्रावासों में लगभग 200 छात्र हैं। इनमें मध्य प्रदेश, बिहार,
राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के छात्र भी हैं। छात्रावास में पिछले करीब
15 दिन से बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित है। शुक्रवार को सुबह छात्रों
का सब्र टूट गया। छात्र हास्टल में एकजुट होकर नारे लगाने शुरू कर दिए।
छात्रों
को हुजूम प्रदर्शन करते हुए विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन तक आ गया।
यहां हंगामे के हालात देखकर विश्वविद्यालय के डीन डॉ. एलके गंगवार और
कुलपति/अपर आयुक्त देवीदास आ गए और उत्तेजित छात्रों से बातचीत की। छात्रों
ने उन्हें बताया कि इसी माह 21 सितंबर से सेमेस्टर परीक्षाएं शुरू हो रही
हैं, लेकिन बिजली और पानी के संकट से छात्र पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं।
वार्डेन
और प्रशासनिक अधिकारियों से की गईं शिकायतें बेमतलब रहीं। छात्रों को तीन
किमी दूर हैंडपंप से पानी लाना पड़ता है। कुछ छात्र पानी खरीदकर पी रहे
हैं। दोनों अफसरों ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि दो दिन के अंदर बिजली और
पानी की व्यवस्था दुरुस्त करा दी जाएगी। इसी के बाद छात्रों ने प्रदर्शन
खत्म किया।