फोटो- 45 चांसलर गोल्ड मेडलिस्ट अंश सक्सेना। संवाद
बांदा। चांसलर गोल्ड मेडलिस्ट आगरा के रहने वाले कृषि वैज्ञानिक अंश सक्सेना ने कहा कि भारत वर्ष कृषि प्रधान देश होने के बावजूद कृषि के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है। इसकी मुख्य वजह वह मानते हैं कि किसानों को बाजार नहीं मिल पाती है। जिससे किसान अपनी उपज का सही मूल्य नहीं ले पा रहे हैं। भारत देश की 50 प्रतिशत जनता का प्रमुख व्यवसाय कृषि है, फिर भी हम जीडीपी दर पर 18 प्रतिशत ही प्रगति कर पाए हैं। यह सोचनीय प्रश्न है।
बीएससी कृषि आनर्स से कृषि वैज्ञानिक बने अंश सक्सेना मूलत आगरा जनपद के रहने वाले हैं। इनके पिता का खुद का टिफिन सर्विस व्यवसाय है। उनके साथ अंश की मां प्रफुल सक्सेना भी हाथ बटाती हैं। छोटा भाई दिव्यांश सक्सेना बांदा कृषि विश्वविद्यालय से बीएससी आनर्स उद्यान की पढ़ाई कर रहे हैं। गोल्ड मेडलिस्ट अंश का कहना है कि गुरुवार को कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित राज्यपाल के कार्यक्रम और उनके भाषण से उन्हें प्रेरणा मिली है। इसके लिए वह कृषि विश्वविद्यालय परिवार के शुक्रगुजार भी हैं। उन्होंने कृषि के क्षेत्र में चार साल पढ़ाई करने में बहुत कुछ सीखा है। इसका उपयोग वह कृषि के क्षेत्र में करेंगे। अंश का कहना है कि भारत सरकार ने कृषि से संबंधित बहुत सी योजनाएं चलाईं हैं, लेकिन अभी किसानों को इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उनका प्रयास होगा कि वह कृषि को और उन्नत बनाने में किसानों को जागरूक करेंगे। खेती किसानी के क्षेत्र में कुछ नया करने की उनकी तमन्ना है।