बेंदाघाट। कुरसेजा धाम में श्रीराम कथा के चौथे दिन
कथा वाचक महंत विजय कौशल (वृंदावन) ने रामवन गमन प्रसंग सुनाया। कहा कि
कुसंगति विनाश की जड़ है। उधर, बड़ी संख्या में महिलाओं ने मंदिर परिसर में
घासपूस से बनाए गए वेदी स्थल की परिक्रमा की।
उन्होंने कहा कि
अयोध्या के राजा दशरथ राम के राज्याभिषेक की तैयारियां कर रहे थे। तभी दासी
मंथरा के कान भरने पर रानी कैकेयी कोप भवन पहुंची। राजा दशरथ उन्हें मनाने
आए। दो वरदान मांगे। इसमें एक में राम को 14 वर्ष का वनवास और दूसरा भरत
का राजतिलक। यही दोनों वरदान राजा दशरथ की मौत का कारण बने।
उन्होंने
कहा कि कुसंग हमेशा विनाश का कारण बनता है। कभी शारीरिक विकलांगता का
माखौल नहीं उड़ाना चाहिए। कथा वाचक ने शराब को भी घातक बताया। कहा कि मदिरा
दुर्गुणों की जननी है।
इसके पूर्व आयोजन प्रेरक आईपीएस अधिकारी
राजाबाबू सिंह ने कहा कि इस क्षेत्र के पिछड़े होने से जो पीड़ा उन्होंने
झेली है, वह नहीं चाहते कि अन्य लोग इससे दो चार हों।
लोगों में
आपसी प्रेम व सहयोग की भावना का विकास होना जरूरी है। इस दौरान कुरसेजा
आश्रम के महंत परमेश्वरदास महाराज, राजेंद्र सिंह चौहान, कमलेश तिवारी,
बेंदा प्रधान पति विवेक सिंह, जयराम सिंह (बछेउरा), राजेश द्विवेदी, राजेश
खरे, हरिभजन गुप्ता इत्यादि मौजूद रहे।