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बांदा: दिव्यांग किसान का अपहरण, घेराबंदी पर छोड़कर भागे बदमाश

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बदौसा/अतर्रा। छह असलहाधारी बदमाशों ने दिव्यांग किसान का घर के पास से अपहरण कर लिया। जंगल में ले जाकर बंदूक की बटों से पीटा। इस बीच पुलिस कांबिंग और घेराबंदी की भनक पर करीब चार घंटे बाद तड़के छोड़कर बदमाश भाग गए। उधर, पुलिस अपहृत किसान पर भी कई आपराधिक मुकदमे बता रही है।
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घटना मंगलवार की रात करीब 10 बजे थाना क्षेत्र के तरसूमा गांव के मजरा पचपेड़िया की है। यहां खेत की रखवाली कर रहे संतोष यादव (50) को बदमाश उसकी आंखों पर पट्टी बांधकर जंगल ले गए। पास में मौजूद पुत्र कल्लू ने देखा तो घरवालों और पुलिस को सूचना दी।
क्षेत्राधिकारी सत्यप्रकाश शर्मा और बदौसा थानाध्यक्ष अरविंद गौर, फतेहगंज थानाध्यक्ष पंकज सिंह, अतर्रा इंस्पेक्टर अखिलेश मिश्र और कालिंजर थानाध्यक्ष ने फोर्स के साथ कांबिंग शुरू कर दी। उधर, ग्राम प्रधान नत्थू यादव और अपहृत का भाई बुद्धविलास ने ग्रामीणों के साथ बदमाशों का पीछा शुरू कर दिया।
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तड़के करीब एक बजे कबरा पुरवा के पास बदमाशों ने अपहृत को मुखबिरी न करने की धमकी देकर जंगल में छोड़ दिया और भाग गए। पुलिस देर रात तक इस घटना को मीडिया से छिपाती रही। उधर, यह भी चर्चा रही कि घटना के पीछे बालू माफियाओं का भी हाथ है। दूसरी तरफ कुछ लोग नवोदित गैंग का कारनामा बता रहे हैं।
बदौसा थानाध्यक्ष का कहना है कि संतोष पर गैंगस्टर व गुंडा एक्ट के केस फतेगंज व बदौसा में दर्ज हैं। वर्ष 2003 में कल्याणपुर गांव के सेवानिवृत्त अध्यापक चंद्रशेखर के अपहरण में भी इसका नाम आया था। थानाध्यक्ष ने अपहरण की घटना से इनकार किया है। कहा कि संतोष ने शराब के नशे में यह रचना रची थी।
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