बांदा। कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक ने किसानों को खरपतवार से फसल को बचाने की सलाह दी है। कहा कि खरपतवार का सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ता है। खरीफ के मौसम में बुंदेलखंड क्षेत्र में धान, तिल और दलहनी फसलों में उर्द व मूंग की खेती की जा रही है।
कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक प्रो.जीएस पवार ने बताया कि धान की फसल में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार सहित जंगली सावा, मोथा व अन्य उगने वाले खरपतवार के नियंत्रण के लिए विषपायरी वैक्सोरियम 200 मिलीलीटर को 120 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें। यह दवा नोमिनी गोल्ड, एडोरा, पावर आदि विभिन्न नामों से बाजार में उपलब्ध है। दलहनी फसलों में उर्द, मूंग में साधारणतया चौड़ी पत्ती, संकरी पत्ती और मोथा खरपतवार बहुत उगते हैं। अगर फसल में खरपतवार की मात्रा ज्यादा है तो ऐसे में खरपतवारनाशी इमेजाथापर का पानी में घोल बनाकर छिड़काव से फायदा होगा। इस खरपतवारनाशी का प्रयोग खरीफ की अन्य दलहनी फसलों जैसे अरहर में भी छिड़काव किया जा सकता है।
कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि रसायन के छिड़काव के समय मुंह को अच्छी तरह ढक कर रखें। ग्लव्स पहन लें। खेत में धान, उर्द, मूंग या सब्जी की फसल लगाई हो और उसमें खरपतवार की अधिकता हो तो रसायनों का प्रयोग न करें। तब खरपतवार को हाथ से ही उखाड़कर नष्ट करना बेहतर होगा।