बांदा। शहर के एक चौथाई भू-भाग के करीब 26 हजार से अधिक कनेक्शन धारकों को पानी की आपूर्ति केन नदी से की जाती है। गर्मी भर तो पानी के लिए हाय-तौबा मची ही रहती है। सर्दी में भी लोगों को पानी की किल्लत झेलनी पड़ रही है। मौजूदा में महज पांच एमएलडी पहुंच रहा है जबकि शहर की प्यास बुझाने के लिए इससे दस एमएलडी पानी की जरूरत होती है।
शहर के खुटला, छोटीबाजार, खिन्नी नाका, मढि़या नाका, कैलाशपुरी इलाकों में इन दिनों पानी की आपूर्ति प्रभावित है। इनमें करीब 26 हजार घरों में पानी की सप्लाई के कनेक्शन हैं। यहीं के निवसी सीताराम, रामशरण का कहना है कि पिछले एक सप्ताह से महज 15 से 20 मिनट ही नलों में पानी आ रहा है। गर्मी में तो 30 मिनट पानी आ जाता था लेकिन सर्दी में 15 मिनट भी पानी नहीं आ रहा है। सर्दी के इस मौसम में सुबह से ही लोगों को पानी के लिए हैंडपंपों पर लाइन लगानी पड़ रही है।
करीब दो दशक पहले अप्रैल महीने में केन नदी का जलस्तर लगभग 98 मीटर हुआ करता था। यह गिरावट सिर्फ एक आकड़ा नहीं, बल्कि क्षेत्र के भविष्य के लिए एक चेतावनी है। इस कमी ने न केवल गर्मी, बल्कि अब सर्दियों में भी पेयजल संकट को जन्म दे दिया है। शहर और आसपास के क्षेत्रों में टंकियों का पानी कम आने लगा है, हैंडपंप जवाब देने लगे हैं और ग्रामीण इलाकों में लोग दूर-दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं।
केन नदी की इस हालत के कई कारण हैं। सबसे बड़ा क्षेत्र में बदलता वर्षा चक्र। बुंदेलखंड में अब बारिश कम होती है या एकदम असामान्य ढंग से होती है। जब बारिश विशेषज्ञों की उम्मीद के अनुरूप नहीं होती, तो नदियों, तालाबों और भूजल का प्राकृतिक संचय प्रभावित होता है। इसके साथ ही अवैध खनन ने नदी का स्वरूप बदलकर रख दिया है।
रेत और पत्थरों के अत्यधिक दोहन से नदी की प्राकृतिक धारा टूट गई और जल धारण क्षमता भी प्रभावित हुई। इधर खेतों में नलकूपों और बोरवेलों की बढ़ती संख्या ने भूजल को तेजी से नीचे धकेला। यह वही पानी था जो बरसात में नदी को जीवित रखता था। जब भूजल ही कम हो गया तो नदी का प्राकृतिक प्रवाह भी कमजोर पड़ने लगा।
केन का जल स्तर नीचे खिसक जाने से इंटेकवेल को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। इंटकवेल से ही बांबेश्वर पर्वत के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को 10.05 एमएलडी पानी पहुंचता था लेकिन मौजूदा समय में महज पांच एमएलडी पानी ही पहुंच पा रहा है। इसके समाधान के लिए केन नदी में अस्थाई रेत का बंधा बनाने का काम किया जा रहा है। इंटकवेल के चैनल तक पानी पहुंचाया जा सके।
- सौरभ प्रकाश, जल संस्थान के अधिशासी अभियंता