खतरे के निशान से ऊपर बह रही केन नदी।
- फोटो : अमर उजाला
बांदा। मध्य प्रदेश की घाटियों में हो रही झमाझम बारिश से बांध उफना गए हैं। केन नदी पर बना गंगऊ बांध का जलस्तर अप्रत्याशित ढंग से बढ़ा है। बांध का पानी 12 फिट ऊपर चढ़ गया है। बरियारपुर बांध में क्रस्टवाल के ऊपर से 15 फिट मोटी जलधारा केन नदी में गिर रही है। नतीजतन गुरुवार को केन ‘लाल’ (खतरे का) निशान पार कर गई। तलहटी में बोई गई सैकड़ों हेक्टेयर सब्जी की फसल डूबने के साथ ही बालू खनन भी ठप हो गया।
गंगऊ, रनगवां और बरियारपुर तीनों बांध मई में डेड स्टोर पर पहुुंच गए थे। इनकी तलहटी पर नाममात्र को पानी बचा था, लेकिन पिछले 48 घंटों में मध्य प्रदेश के जल संग्रह क्षेत्रों (इनकैचमेंट एरिया) में हुई मूसलाधार बारिश ने गंगऊ बांध को उफना दिया है। गुरुवार को इस बांध का जलस्तर बढ़कर 749 फिट हो गया। बुधवार को यहां का पैमाना 737.8 फिट था। अप्रत्याशित वृद्धि से बांध की क्रस्टवाल से 12 फिट ऊंची जलधारा केन नदी में गिर रही है।
लगभग एक लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज बताया गया। नतीजतन में बरियारपुर बांध का जलस्तर भी बढ़ने लगा है। गुरुवार को बरियारपुर बांध की क्रस्टवाल से 15 फिट ऊंची जलधारा गिर रही है। 3,73,700 क्यूसिक पानी डिस्चार्ज हो रहा है। बुधवार को पांच फिट ऊंची जलधारा रिकार्ड की गई थी।
दोनों बांधों के उफनाने से केन नदी खतरे का निशान (104 मीटर) पार कर गई। गुरुवार की रात तक इसका जल स्तर बढ़कर 105.25 मीटर हो जाएगा। यह खतरे के निशान से 1.25 मीटर ऊपर है। केंद्रीय जल आयोग बाढ़ एवं पूर्वानुमान विभाग के उप मंडलीय अभियंता अरविंद कुमार राय ने केन नदी के बढ़ने की जानकारी दी है।
उधर, पन्ना (मध्य प्रदेश) में बारिश जारी है। इससे बांध उफना जाने और केन नदी का जल स्तर बढ़ने पर सिंचाई विभाग ने मुख्य केन नहर खोल दी है। तीन फिट गेज खोलने से नहर में लगभग 700 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है। शुक्रवार को और गेज बढ़ाया जा सकता है। वहीं केन का जलस्तर बढ़ जाने से नदी की तलहटी में बोई गई सब्जी की बारियां डूब गईं। सैकड़ों एकड़ सब्जियां नष्ट हो गईं। घाटों में पानी भरने से बालू का खनन भी ठप हो गया।