बांदा को बाढ़ से बचाने के लिए केन नदी तट पर बनाया गया मार्जिनल बांध।
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बांदा। गंगऊ और बरियारपुर बांधों का जलस्तर और डिस्चार्ज में आई भारी गिरावट के बाद केन नदी भी तेजी से सिमटने लगी है। लगभग पांच मीटर नीचे आ गई है। हालांकि खतरे के निशान से यह अभी भी दो मीटर ऊपर है। उधर, चिल्ला घाट में यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ते रहने से दो दर्जन से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। बांदा-बहराइच स्टेट हाइवे चिल्ला और ललौली के पास जलमग्न होने से आवागमन के लिए बंद कर दिया गया है। यमुना किनारे बसे गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है। मध्य प्रदेश में बारिश थमने के बाद गंगऊ और बरियारपुर बांधों के जल स्तर में लगभग पांच फिट की कमी आई है। बरियारपुर बांध से दो दिन पूर्व केन नदी में गिर रहे चार लाख क्यूसिक से ज्यादा पानी अब घटकर मात्र 79 हजार क्यूसिक रह गया है।
बांध क्षेत्रों में दूसरे दिन भी बारिश नहीं हुई। बांध घटने से केन नदी का जल स्तर बांदा में 111 से घटकर 106 मीटर पर आ गया है। लगातार घट रही है। केंद्रीय जलायोग की पूर्वानुमान बुलेटिन के मुताबिक केन नदी का जल स्तर मंगलवार को दोपहर खतरे के निशान से लगभग दो मीटर नीचे 102 मीटर पर आ जाएगा। इसके बाद भी इसके घटने का सिलसिला जारी रहेगा। उधर, यमुना नदी लगातार बढ़त बनाए है। चिल्ला घाट में इसका खतरे का निशान 100 मीटर पर है। सोमवार को देर शाम नदी का जलस्तर 102 मीटर का पैमाना पार कर गया। नदी किनारे आबाद पैलानी तहसील के चिल्ला, बिलहटी डेरा, तगड़ा डेरा, पंडवन डेरा, लसड़, बसधरी, गुरगवां, पैलानी डेरा, अमचौली, सबादा, लोमर, सादीमदनपुर आदि यमुना के पानी के घेरे में आ गए हैं। चिल्ला गांव के बाढ़ पीड़ितों को पीडब्ल्यूडी डाल बंगले में भेजा गया है। जौहरपुर और बेंदा गांव में भी पानी भर गया है। बबेरू तहसील के कटार, खेरा, जोरावरपुर, चरका, बीरा, लखनपुर, औदहा आदि गांव बाढ़ की चपेट में हैं। केंद्रीय जल आयोग के एसडीओ अरविंद कुमार राय के मुताबिक यमुना का जल स्तर अभी और बढ़ेगा।