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केन-बेतवा परियोजना: विस्थापित आदिवासियों ने सांकेतिक फंदा लगाने की चेतावनी दी

Thu, 16 Apr 2026 01:06 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
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केन नदी के पानी में खड़े होकर प्रदर्शन करते ग्रामीण। स्त्रोत : ग्रामीण - फोटो : 1
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करतल (बांदा)। केन-बेतवा लिंक परियोजना से विस्थापित हो रहे आदिवासियों और किसानों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। इसके विरोध में बुधवार को कई मोर्चों पर प्रदर्शन हुए। प्रशासन पर धोखाधड़ी और दमनकारी नीतियों का आरोप लगाते हुए, उन्होंने बृहस्पतिवार को सांकेतिक फंदा लगाने की चेतावनी दी है।
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प्रभावित ग्रामीणों ने बीते मंगलवार को केन नदी में जल सत्याग्रह किया था। बुधवार को मिट्टी सत्याग्रह और चिता आंदोलन 10वें दिन भी जारी रहा। आंदोलन के समर्थन में कई गांवों में चूल्हा बंद भूख-हड़ताल भी की गई। आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रशासन बिना पूर्ण मुआवजे व पुनर्वास के लोगों को बेघर कर रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने प्रशासन की हठधर्मिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि विकास के नाम पर आदिवासियों का विनाश स्वीकार नहीं किया जाएगा। एडीएम पन्ना और छतरपुर प्रशासन के साथ हुई वार्ता विफल रही। इसके बाद आंदोलनकारियों ने पारदर्शी सर्वे और बिना कटौती के सीधे मुआवजे की मांग की। प्रशासनिक बेरुखी से नाराज आंदोलनकारियों ने बृहस्पतिवार को सांकेतिक फांसी लगाकर विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। वर्तमान में ग्रामीण प्रदर्शन स्थलों पर डटे हुए हैं और किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला है।
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योजना का महत्व

केन-बेतवा लिंक परियोजना भारत की पहली राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना है। जिसका उद्देश्य मध्य प्रदेश की केन नदी के अतिरिक्त पानी को उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी में स्थानांतरित कर बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त क्षेत्रों (झांसी, बांदा, ललितपुर, महोबा, पन्ना, छतरपुर) को सिंचित करना है। लगभग 44,605 करोड़ की इस परियोजना से 10 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई, 62 लाख लोगों को पेयजल और 103 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य है।

केन नदी के पानी में खड़े होकर प्रदर्शन करते ग्रामीण। स्त्रोत : ग्रामीण- फोटो : 1

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