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केन-बेतवा परियोजना : विस्थापितों का चिता आंदोलन जारी

Tue, 14 Apr 2026 01:12 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
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फोटो - 22 चिता पर लेटकर प्रदर्शन करते ग्रामीण। स्त्रोत: आंदोलनकर्ता
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करतल (बांदा)। बुंदेलखंड की केन नदी पर केन-बेतवा लिंक परियोजना से विस्थापित हो रहे पन्ना और छतरपुर जिलों के 18 गांवों के हजारों ग्रामीण आठ दिनों से चिता आंदोलन कर रहे हैं। वे नदी की लहरों पर प्रतीकात्मक चिताओं पर लेटकर हमें न्याय दो या मौत दो की मांग कर रहे हैं। रविवार को आंदोलन अपने चरम पर पहुंच गया, जब पीड़ित परिवारों ने सामूहिक भूख हड़ताल की। ग्रामीण सिर्फ मुआवजा नहीं, बल्कि सम्मानजनक पुनर्वास के तहत गांव के बदले गांव चाहते हैं।
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निर्माणाधीन ढोड़न बांध स्थल पर चल रहे इस आंदोलन को दबाने के लिए सरकारी मशीनरी सक्रिय हो गई है। छतरपुर जिला मजिस्ट्रेट ने क्षेत्र में धारा 163 लागू कर दी है, और आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर के विरुद्ध वन अपराध दर्ज किया गया है। आंदोलन स्थल तक राशन, पानी और चिकित्सा सुविधा पहुंचने में बाधाओं के आरोप हैं, जिससे यह संघर्ष मानवीय संकट का रूप ले रहा है।



आंदोलनकारियों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण की कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया और भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 सही तरीके से लागू नहीं हुआ। वे यह भी कहते हैं कि 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले पात्र व्यक्तियों को 12.5 लाख रुपये का पुनर्वास पैकेज नहीं मिल रहा है।
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अधिकारियों से बातचीत बेनतीजा



जय किसान संगठन के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन के बाद पन्ना और अजयगढ़ के एसडीएम तथा जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने आंदोलन स्थल ढोड़न बांध पहुंचकर चर्चा की। पन्ना एसडीएम संजय कुमार नागवंशी ने महिलाओं से आंदोलन खत्म करने और भूख हड़ताल तोड़ने की अपील करते हुए समस्याओं के निराकरण का आश्वासन दिया। हालांकि अमित भटनागर ने अधिकारियों से विस्थापन की वैधानिक प्रक्रियाओं को दरकिनार करने पर सवाल उठाया और ग्राम सभा के दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की।





योजना का महत्व



केन-बेतवा लिंक परियोजना भारत की पहली राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना है। जिसका उद्देश्य मध्य प्रदेश की केन नदी के अतिरिक्त पानी को उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी में स्थानांतरित कर बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त क्षेत्रों (झांसी, बांदा, ललितपुर, महोबा, पन्ना, छतरपुर) को सिंचित करना है। लगभग 44,605 करोड़ की इस परियोजना से 10 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई, 62 लाख लोगों को पेयजल और 103 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य है।

फोटो - 22 चिता पर लेटकर प्रदर्शन करते ग्रामीण। स्त्रोत: आंदोलनकर्ता

फोटो - 22 चिता पर लेटकर प्रदर्शन करते ग्रामीण। स्त्रोत: आंदोलनकर्ता

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