केन-बेतवा नदियों के गठजोड़ की परियोजना पर कई स्वयंसेवी संगठनों के लगातार किए जा रहे विरोध की कड़ी में अब भारतीय किसान यूनियन का नाम भी जुड़ गया है। यूनियन ने आरोप लगाया है कि सरकार जिसे विकास की योजना बता रही है यह तमाम किसानों और ग्रामीणों के लिए विनाश की परियोजना साबित होगी।
हाल ही में केंद्रीय मंत्री उमा भारती की पहल पर लंबे अरसे से ठंडे बस्ते में पड़ी केन-बेतवा लिंक परियोजना पर फिर काम शुरू हो गया है। केंद्रीय जल अभिकरण प्राधिकरण के अधिकारियों से पिछले हफ्ते योजना में शामिल किए गए क्षेत्रों के गांवों में जन सुनवाई कैंप लगाए थे। इसमें कई स्वयंसेवी संगठनों सहित प्रभावित क्षेत्र के गांवों के किसानों ने भारी विरोध दर्ज कराया था।
अब इस योजना के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन भी खुलकर सामने आ गई है। प्रांतीय अध्यक्ष और राष्ट्रीय किसान समन्वयक समिति सदस्य डॉ.साहबलाल शुक्ल ने बुधवार को मीडिया को जारी किए बयान में कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना से बुंदेलखंड के करीब 10 गांव प्रभावित हो रहे हैं। हजारों एकड़ उपजाऊ भूमि योजना की भेंट चढ़ जाएगी।
उन्होंने कहा कि खेती मां के तुल्य होती है। इसका मूल्य पैसों में नहीं आंका जा सकता। जल, जंगल, नदी, पहाड़ ही बुंदेलखंड की पहचान रहा है। इनके खात्मे का सीधा मतलब प्रकृति से छेड़छाड़ और कुदरती आपदाओं को बढ़ावा देना है। साथ ही पन्ना टाइगर और अन्य पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा।
जंगलों के सफाए का नतीजा है कि जंगली जानवर नील गाय, हिरन, सुअर, बंदर आदि गांवों में घुसकर फसलों को नष्ट कर रहे हैं। किसान नेता ने कहा कि केन नदी पर बने गंगऊ बांध में ब्रिटिश शासन में करीब चार लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई होती थी। बांध में सिल्ट जमा होने से इसकी क्षमता आधी भी नहीं रह गई।
केन की डाउन स्ट्रीम पर ग्रेटर गंगऊ परियोजना की फाइल सालों से दबी पड़ी है। डॉ.शुक्ल ने केन-बेतवा लिंक का विरोध करते हुए इसके और भी कई नुकसानों से आगाह कराया है। कहा है कि किसान यूनियन इसका विरोध करेगी।