चित्रकूट में रानीपुर वन्य विहार को नेशनल पार्क बनाए जाने की तेजी से चल रहीं कवायदें दरअसल केन-बेतवा लिंक परियोजना की पृष्ठभूमि में है। सीमावर्ती पन्ना जिले में स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क का बड़ा हिस्सा केन-बेतवा लिंक परियोजना की भेंट चढ़ रहा है। इसका स्थानीय बाशिंदे और कई स्वयंसेवी संगठन विरोध कर रहे हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। उसके एवज में रानीपुर वन्य विहार को नेशनल पार्क में तब्दील किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर यह काम छह माह में पूरा करने का भरोसा दिलाया है। रानीपुर उत्तर प्रदेश का तीसरा नेशनल पार्क होगा।
अटल बिहारी वाजपेई के प्रधानमंत्रित्व काल में स्वीकृत केन-बेतवा लिंक परियोजना पर अब काम शुरू हो गया है। मध्य प्रदेश में डोढन गांव के पास बांध बनाया जाना है। इसमें पन्ना रिजर्व टाइगर (नेशनल पार्क) का लगभग 72 वर्ग किलोमीटर इलाका शामिल किया जा रहा है। ऐसे में पन्ना रिजर्व में बड़ी संख्या में मौजूदा बाघ व अन्य जीव जंतुओं के जीवन पर खतरा है। इसके अलावा बड़ी तादाद में आबाद स्थानीय आदिवासी भी प्रभावित होंगे। तमाम विरोधों के बावजूद केन-बेतवा लिंक पर काम जारी है। इसी श्रृंखला में पन्ना रिजर्व टाइगर की क्षतिपूर्ति के रूप में चित्रकूट जिले के रानीपुर वन्य विहार को नेशनल पार्क के रूप में स्थापित किया जा रहा है। इसकी कवायदें शुरू हो गई हैं। दो दिन पूर्व वन विभाग के मुख्य संरक्षक सुनील चौधरी ने रानीपुर का स्थलीय निरीक्षण भी किया।
उन्होंने बताया कि एक सप्ताह के अंदर लखनऊ से विभागीय टीम यहां आकर स्थानीय कर्मचारियों को ट्रेनिंग देगी। उधर, राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हलफनामे के मुताबिक रानीपुर को नेशनल पार्क बनाने का काम छह माह के अंदर पूरा किया जाना है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका पन्ना परिवर्तन मंच ने दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई के बाद पिछले वर्ष अगस्त में सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी (सीईसी) का गठन कर मौके पर जाकर जांच के आदेश दिए थे। इस वर्ष 27 मार्च को यह कमेटी मौके पर जांच को आई थी। रानीपुर नेशनल पार्क बन जाने के बाद उत्तर प्रदेश में नेशनल पार्कों की संख्या बढ़कर तीन हो जाएगी। अभी दो नेशनल पार्क हैं। इनमें दुधुवा टाइगर रिजर्व और पीलीभीत टाइगर रिजर्व शामिल हैं।
मुख्यमंत्री पिछले वर्ष दे चुके हैं मंजूरी
रानीपुर वन्य जीव विहार को टाइगर रिजर्व (नेशनल पार्क) घोषित करने की सहमति/मंजूरी मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने 30 अगस्त 2018 को अपनी अध्यक्षता में हुई राज्य वन जीव बोर्ड की बैठक में दी थी। बैठक में यह प्रस्ताव प्रदेश की प्रमुख सचिव (वन) कल्पना अवस्थी ने पेश किया था। रानीपुर को नेशनल पार्क बनाए जाने की मांग कई वर्षों पूर्व से की जाती रही है। ब्यूरो
पन्ना टाइगर उजड़ने से 40 बाघ खतरे में
केन-बेतवा लिंक के लिए उजाड़ा जा रहा पन्ना टाइगर रिजर्व नेशनल पार्क 1981 में स्थापित हुआ था। इसका क्षेत्रफल लगभग 542 वर्ग किलोमीटर है। मुख्य रूप से इसमें राष्ट्रीय पशु बाघ संरक्षित हैं। इनमें संख्या 40 के आसपास बताई गई है। यूपी-एमपी में स्थित बुंदेलखंड का यह इकलौता टाइगर पार्क है। पन्ना रिजर्व पार्क में गिद्धों का भी बसेरा है। लिंक परियोजना का विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि बांध बनने पर इस वन्य क्षेत्र के 14 लाख से अधिक वृक्षों का सफाया हो जाएगा। प्रवास सोसायटी के आशीष सागर दीक्षित का कहना है कि इस परियोजना से केन नदी का नैसर्गिक (कुदरती) प्रवाह बाधित होगा। इसका दुष्परिणाम हजारों बुंदेलियों को भुगतना पड़ेगा। पर्यावणीय दृष्टि से यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
पाठा की पहचान बनेगा नेशनल पार्क
चित्रकूट जिले के रानीपुर वन्य विहार को नेशनल पार्क में परिवर्तित कर देने पर कई दशकों से गरीबी, बेरोजगारी, पेयजल संकट और डाकुओं का दंश झेल रहे पाठा क्षेत्र में एक नई किरण जगमगाएगी। अभी इस जंगल में डकैतों का बोलबाला है। नेशनल पार्क विकसित हो जाने पर यहां की सूरत और हालात बदल जाएंगे। पर्यटकों के आने का सिलसिला रहेगा। विभागीय स्टाफ के अधिकारी व कर्मचारी आबाद होंगे। रानीपुर को एक नई पहचान मिलेगी। इस क्षेत्र के प्रमुख काश्तकार वासिफ जमां खां (जारौमाफी) ने नेशनल पार्क बनने पर खुशी जताई है।