केन-बेतवा गठजोड़ परियोजना में ग्रामीणों को रजामंद करने को केंद्रीय जल अभिकरण की दूसरी लोक सुनवाई भी कारगर नहीं हुई।
परियोजना
मेें शामिल किए जा रहे गांवाें के कुछ लोग सशर्त रजामंदी की बात कर रहे
हैं। उधर, परियोजना का विरोध कर रहे संगठनोें ने सुनवाई के दौरान केेंद्र
सरकार के अफसरों को सात सूत्रीय ज्ञापन दिया। इसमें कहा कि ग्रामीणों को
योजना की डीपीआर दिए बगैर इस सुनवाई का कोई मतलब नहीं है। परियोजना से
फायदे कम नुकसान ज्यादा हैं।
केन-बेतवा गठजोड़ परियोजना को केंद्र
सरकार वर्ष 2005 में मंजूरी दी है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकार तथा
केंद्र सरकार के बीच करार भी हो चुका है।
अब इस परियोजना मेें तेजी
आ गई है। चार दिन पूर्व 23 दिसंबर को छतरपुर जनपद के सिलोन गांव मेें जन
सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण अधिकारियों को विरोध झेलना पड़ा
था। शनिवार को पन्ना जिले के हिनौता गांव मेें दूसरी सुनवाई मेें भी यही
स्थिति रही।
बुंदेलखंड भविष्य परिषद संयोजक पुष्पेंद्र कुमार सिंह,
जिला संयोजक प्रभाकर त्रिपाठी, केन रीवर ग्रुप बुंदेलखंड के शशिभाल सिंह,
पेयजल उपभोक्ता समिति (बांदा) के राम प्रकाश और किसान राम किशोर (हमीरपुर)
ने सुनवाई कर रहे अफसरों को ज्ञापन देकर पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए की जा
रही लोक जन सुनवाई निरस्त करने की मांग की।
कहा कि लोक सुनवाई से
पहले केन नदी के संपूर्ण डाउन स्ट्रीम और प्रस्तावित बांध और लिंक नहर
परिक्षेत्र में होने वाले पर्यावरणीय, आर्थिक और सामाजिक प्रतिकूल-अनुकूल
प्रभावों का विस्तृत अध्ययन कर रिपोर्ट की प्रति हिंदी में उपलब्ध कराई
जाए।