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Banda News: कालिंजर में कतकी मेला आज से, स्नान को जुटने लगे श्रद्धालु

Tue, 04 Nov 2025 11:53 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
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फोटो - 04 कालिंजर दुर्ग का मनोहारी दृश्य। संवाद
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कालिंजर। कालिंजर दुर्ग में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर बुधवार से पांच दिवसीय मेला शुरू होगा। प्रशासन ने मेला के पूर्व सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सभी मार्गों पर बैरियर लगाए गए हैं। इसके साथ ही यात्रियों के आवागमन के लिए अतिरिक्त बसें व सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है। मेला परिसर में बाहर से आए दुकानदारों ने अपनी दुकानें सजा ली हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो चुका है।
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कालजयी दुर्ग कालिंजर में कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर पांच दिवसीय मेला लगता है। दूर-दूर से श्रद्धालु दुर्ग पहुंचकर नीलकंठ महादेव का दर्शन-पूजन करते हैं। मेला की शुरुआत वर्ष 1165 से 1202 ईसवीं के बीच चंदेल शासक परिमार्दिदेव ने कराई थी। दुर्ग से जुड़े इतिहास में जानकारी मिलती है कि पद्मावती का नृत्य उस समय महोत्सव का प्रमुख आकर्षण हुआ करता था।
एक हजार वर्ष से ज्यादा पुरानी परंपरा आज भी कतकी मेला की रूप में जारी है। नीलकंठ मंदिर के राजपुरोहित आचार्य पंडित शंकर प्रताप मिश्रा ने बताया कि समुद्र मंथन के बाद जब महादेव ने विषपान किया तो यहीं शांति के लिए आए। इसका उल्लेख शिव पुराण, पद्म पुराण, महाभारत सहित अन्य पुराणों में मिलता है।
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मान्यता है कि महादेव के पुत्र कार्तिकेय के जन्मोत्सव पर लगने वाले इस मेला में दुर्ग के जलाशय में एक माह तक कार्तिक स्नान करने वाले भक्तों को एक हजार गायों के दान का पुण्य मिलता है और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी महत्व को देखते हुए जिले सहित चित्रकूट, सतना, प्रयागराज, कानपुर, लखनऊ, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, रीवा सहित अन्य जनपदों के श्रद्धालु यहां बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।
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मनोरम दुर्ग है कालिंजर
चंदेलकालीन दुर्ग के ऊपर समतल क्षेत्र बहुत मनोरम व दर्शनीय है। दुर्ग के ऊपर स्थित रानी महल, चौबे महल, रंग महल, जखीरा महल, कोटि तीर्थ, राजा अमान सिंह महल, मोती महल, सरग्वाह, सीता कुंड, बुड्ढा-बुड्ढी तालाब दुर्ग की धरोहर हैं। यहां की मृगधारा का रहस्य आज भी बना हुआ है। इसमें एक विशाल चट्टान से सैकड़ों वर्ष से पानी की अनवरत धारा निकल रही है। इस पानी से लोग अपनी प्यास बुझाते हैं। मान्यता है कि इसका पानी अमृत तुल्य है।

कालेश्वर मेला आज, होगा महादेव का दुग्धामिभषेक
फोटो - 05 मंदिर परिसर में दुकान लगाने की तैयारी करते दुकानदार। संवाद
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पैलानी। निबाइच गांव स्थित कालेश्वर मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा महोत्सव को लेकर तैयारी पूरी हो गईं हैं। इस स्थल पर कार्तिक पूर्णिमा पर भगवान शिव को जलाभिषेक की जगह दुग्धाभिषेक किया जाता है। मेला में बांदा, चित्रकूट, कानपुर, महोबा, हमीरपुर, राठ सहित अन्य स्थानों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। दो दिवसीय मेला के आखिरी दिन यहां दंगल आयोजित होगा। मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में बाहरी दुकानदारों ने दुकानें सजा लीं हैं। मंदिर के महंत गोविंद दास ब्रह्मचारी, थानाप्रभारी राजेश वर्मा सहित अन्य मेला की व्यवस्थाओं को संभाले हुए हैं। (संवाद)

फोटो - 04 कालिंजर दुर्ग का मनोहारी दृश्य। संवाद

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