बलखंडीनाका में नवचेतना बाल समाज द्वारा सजाई गई प्रतिमा।
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बांदा। शारदीय नवरात्र की सप्तमी पर मां कालरात्रि की पूजा की गई। घरों से लेकर मंदिरों तक पूजन कीर्तन हुआ। ढोलकों की थाप पर भजन-कीर्तनों का भी दौर चला। पंडालों में कन्या भोज और प्रसाद के लंगर हुए।
नवरात्र की सप्तमी को कालरात्रि की पूजा से वह भक्तों की सभी मनोवांछित कामनाएं पूरी करती हैं। शंकर के रूप में वह कभी रुद्राणी बनकर भक्तों का कल्याण करती हैं तो कभी चंडिका बनकर चंड-मुंड का संहार करती हैं। उधर, नवरात्र की समाप्ति की ओर है। कालूकुआं चौराहे पर सजी देवी प्रतिमा राजस्थान के कैला देवी मंदिर का लुक लिए है। मर्दननाका (डीएवी कॉलेज) रोड में कलाकारों ने रंगीन रस्सियों के सहारे देवी पंडाल को कानपुर के जेके मंदिर का स्वरूप दिया है।
सट्टन चौराहे पर करीब 40 फीट ऊंचा देवी पंडाल में रंगीन रोशनी में भव्य नजर आता है। उधर, अतर्रा प्रतिनिधि के मुताबिक जय वैष्णो देवी सेवा संघ लखन कालोनी की ओर से 40 सालों से देवी प्रतिमा सजाई जा रही है। सिद्धपीठ के रूप में प्रसिद्ध इस प्रतिमा के दर्शन को दूर-दराज से भक्त आ रहे हैं। पंडित राकेश त्रिपाठी यहां पूजा का जिम्मा संभाले हैं। संरक्षक कवींद्र कुमार त्रिवेधी ने बताया कि मूर्ति व पंडाल लाइट जबलपुर से आई है।
राजकुमार पटेल, राजकुमार गुप्ता, राकेश गौतम, पप्पू गुप्ता, रामदेव गुप्ता, रोहित, आशीष, राजकिशोर वाजपेयी आदि का सहयोग है। उधर, मटौंध में दर्जन भर से ज्यादा दुर्गा प्रतिमाएं भक्तों का मन मोह रही हैं। इचौली चौराहे पर रामआसरे राही (महोबा) और निरंजन पार्टी (सरीला) के बीच जवाबी कीर्तन हुई। बराबरी रही दोनों पार्टियों को शील्ड व नगद पुरस्कार दिया गया। संचालक रविकरण ने विधायक दलजीत सिंह को सम्मानित किया। उधर, शुकलाना मोहाल में कानपुर की भजन गायिका भावन सिंह के भजनों पर भक्त रात भर झूमे।