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यूं ही भावनाओं को मैं शब्दों में बांधती रहूं...

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वरिष्ठ कवयित्री डा.शबाना को पुष्प गुच्छ भेंट करते युवा कवि। - फोटो : BANDA
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बांदा। विश्व कविता दिवस पर उभरते नए कवियों ने वरिष्ठ कवियों को सम्मानित किया। अपनी रचनाओं के जरिए कविता की महानता बयां की और वरिष्ठों के प्रति सम्मान जताया। वरिष्ठ कवयित्री डा.शबाना ने ‘यूं ही भावनाओं को मैं शब्दों में बांधती रहूं, हर अवरोध को निश्चिंत मैं पाठकों के बल से लांघती रहूं, काश बिगड़ते समाज का कुछ सुधार कर सकूं’ सुनाकर वाहवाही लूटी।
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सोमवार को विश्व कविता दिवस मनाया गया। युवा कवि/शायर अनुराग विश्वकर्मा, आदित्य कौशल और युवा कवयित्री दीपा पटेल तथा राशि दोसर आदि ने कविताएं पेश कीं। साथ ही इन सभी कवियों ने जिले की प्रमुख महिला चिकित्सक डा.शबाना रफीक को पुष्प गुच्छ भेंटकर सम्मानित किया। डा.शबाना रफीक ने युवा कवियों को कविता की विशेषताएं बताईं और समाज को अच्छा संदेश देने वाली कविताएं लिखने के लिए प्रेरित किया।
बताया कि संयुक्त राष्ट्र शिक्षण, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने 1999 में 21 मार्च को विश्व कविता दिवस घोषित किया था। इसके पीछे उद्देश्य था कि कविताओं के माध्यम से सीमाओं, धर्मों और भाषाओं का भेद मिटाकर पूरी दुनिया को सार्थक संदेश दिए जाएं। कवि आदित्य कौशल ने देश भक्ति पर, अनुराग ने मानवता पर और राशि दोसर ने इंसानियत को बढ़ावा देने का संदेश देने वाली कविता पढ़ी।
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