बांदा। बुंदेलखंड के मध्यप्रदेश स्थित बकस्वाहा के जंगल को बचाने की जंग अब जंगल की आग की तरह से तेजी से फैलती जा रही है। पर्यावरण प्रेमी और इसके पैरोकार संगठनों और कार्यकर्ताओं के बाद जन प्रतिनिधि भी इस मुहिम में शामिल हो गए हैं। इसके बाद अब बकस्वाहा के करीब दो लाख से ज्यादा हरे पेड़ों को कटने से बचाने और हरियाली कायम रखने की खातिर बुंदेलखंड के धर्मगुरुओं ने भी मोर्चा संभाल लिया है। यहां के धर्मगुरु भी आगे आए हैं।
मोर्चा की अगुवाई चित्रकूट के महंत कर रहे हैं। इस बीच चित्रकूट प्रमुख द्वार के महंत स्वामी मदन गोपाल दास महाराज की अगुवाई में बकस्वाहा के बम्हौरी में पर्यावरण बचाओ चौपाल आयोजित की गई। पर्यावरण प्रेमियों ने पेड़ों से चिपककर इन्हें बचाने के नारे लगाए। महंत मदन गोपाल दास ने कहा कि मौजूदा महामारी में लोगों को पेड़ और प्रकृति का महत्व समझ में आ गया है। उन्होंने कहा कि बकस्वाहा जंगल बचाने को जब तक स्थानीय लोग एकजुट होकर आगे नहीं आएंगे तब तक ये लड़ाई अधूरी ही रहेगी। चौपाल को संबोधित करते हुए पर्यावरण कार्यकर्ता रामबाबू तिवारी ने कहा कि धीरे-धीरे यह राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बनता जा रहा है। सरकार को बैक फुट पर आना ही पड़ेगा। कहा कि जंगल को किसी भी तरह से कटने से बचाया जाएगा।
चौपाल को अन्य लोगों ने भी संबोधित करते हुए बकस्वाहा के हरे-भरे जंगल को बचाने के लिए अन्य लोगों से भी आगे आने का आह्वान किया। चौपाल के बाद पर्यावरण प्रेमियों ने यहां पेड़ों से चिपककर नारे लगाए कि बकस्वाहा जंगल की जंग में, हम सब संग में। हम सबने ठाना है, पर्यावरण बचाना है। कहा कि महामारी खत्म होते ही भारी तादाद में लोग इस जंगल में जमा होंगे। स्थानीय निवासी दीपक बलेरा ने कहा कि हीरा कंपनी ने लोगों को यह लालच दिया है कि रोजगार दिया जाएगा और विकास होगा। शायद इसी वजह से इस आंदोलन में अभी सभी की भागीदारी नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि इस बारे में ग्रामीणों को जागरूक किया जाएगा।
जुलाई में तीन दिन लगेगा जंगल में जमघट
बांदा। बकस्वाहा आंदोलन से जुड़े आधा सैकड़ा से ज्यादा पर्यावरण प्रेमियों ने रविवार (13 जून) को वेबिनार मीटिंग में तय किया कि इस आंदोलन में केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य जंगलों की कटान के मुद्दे भी शामिल किए जाएंगे। डॉ. धर्मेंद्र कुमार की अध्यक्षता में हुई वेबिनार में यह तय किया गया कि राष्ट्रीय स्तर की समन्वय समिति गठित होगी। अगले माह जुलाई में देश के सभी राज्यों से बकस्वाहा पहुंचने के लिए तीन दिवसीय कार्यक्रम तय किया जाएगा। इसके लिए 24, 25 व 26 जुलाई तय की गई। पोस्टकार्ड अभियान को और तेज करने को कहा गया। इसके अलावा बकस्वाहा से संबंधित वीडियो बनाकर सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफार्म पर प्रसारित करने की भी रणनीति बनी। आंदोलन में जुड़ रहे धर्म गुरुओं का आभार जताया गया। वेबिनार में कमलेश सिंह (उद्घोष फाउंडेशन, रांची), आनंद पटेल (पर्यावरण संरक्षण समिति, भोपाल), करुणा रघुवंशी (भोपाल), ईहा दीक्षित (मेरठ), अनुराग विश्नोई (पंजाब), राकेश विश्नोई (हरियाणा), पंकज पांडेय (बनारस) सहित तमाम पर्यावरण प्रेमी शामिल रहे। (संवाद)
विधायकों ने भी भेजा था पीएम, सीएम को पत्र
बांदा। बुंदेलखंड के बकस्वाहा जंगल के दो लाख से ज्यादा पेड़ों को कटने से बचाने के लिए मध्य प्रदेश विधानसभा के चार विधायकों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर हीरा खनन परियोजना पर पुनर्विचार का अनुरोध कर चुके हैं। इन विधायकों में सत्तारूढ़ दल भाजपा के भी हैं। महाराजपुर (छतरपुर) नीरज विनोद दीक्षित, बिजावर (छतरपुर) क्षेत्र के विधायक राजेश शुक्ला बबलू भइया, आगर (मालवा, मध्यप्रदेश) के विधायक विपिन वानखेड़े और विधायक तथा एम्स, नई दिल्ली के पूर्व सहायक प्रोफेसर डा. हिरालाल जंगल को कटने से बचाने को आगे आ चुके हैं। (संवाद)
पर्यावरण प्रेमी लगातार भर रहे हैं हुंकार
बकस्वाहा के जंगल को बचाने के लिए देश के अधिकांश हिस्सों से पर्यावरण प्रेमी भी हुंकार भर रहे हैं। यहां जंगल में आए दिन विरोध की गतिविधियां भी जारी हैं। वेबिनार के जरिए भी सेव बकस्वाहा फारेस्ट मुहिम काफी तेजी से चलाई जा रही है। इसमें अब तक एक लाख से ज्यादा पर्यावरण प्रेमी जुड़ भी चुके हैं। बकस्वाहा जंगल को बचाने के लिए सोशल मीडिया का भी भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है। (संवाद)