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जयंती पर नाटककार आगा को याद किया

Sun, 05 Apr 2015 11:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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मशहूर नाटककार आगा हश्र कश्मीरी की जयंती पर उन्हें याद किया गया। बुंदेलखंड में नाटकों के प्रति आकर्षण पैदा करने और देश-विदेश तक ख्याति दिलाने के लिए उनके योगदान को सराहा। चरखारी में उनके द्वारा बनवाई गई नाट्यशाला के संरक्षण की मांग की।
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स्टेशन रोड स्थित एक होटल में रविवार को आयोजित कार्यक्रम में कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुलसचिव देवीदास ने कहा कि आगा हश्र कश्मीरी को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने बुंदेलखंड नाट्य अकादमी गठित करने को प्रेरित किया। डा.चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ‘ललित’ ने उनकी उर्दू व हिंदी लेखन की सराहना की।

हिंदी में लिखे गए ‘सीता वनवास’ नाटक पर महाराजा चरखारी ने उन्हें ‘पंडित’ की उपाधि दी थी। पूर्व उप निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क शिव प्रसाद भारती ने कहा कि चरखारी की नाट्यशाला बनकर तैयार होने पर हश्र ने इसे हिंदुस्तान की बेजोड़ नाट्यशाला बताया था। आज वह संरक्षण के अभाव में दम तोड़ रही है।
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बीबी लश्करी के परिवार ने अपना उत्तराधिकार समझ कर यह गोष्ठी आयोजित की। कैप्टन सूर्य प्रकाश मिश्र ने नाट्यशाला संरक्षण की मांग की। मुंबई से आए फिल्म प्रोड्यूसर सुहेल अहमद ने ‘महोबा गेट वे आफ खजुराहो’ और ‘गांव की माटी’ फिल्मों की सीडी का विमोचन कराया।

इस मौके पर उन्होंने आगा हश्र के नाटकों पर फिल्म बनाने की घोषणा भी की। कार्यक्रम का संचालन शायर मुईन राही ने किया। अशोक त्रिपाठी जीतू, संतोष त्रिवेदी, दीनदयाल सोनी, जेपी यादव, बीडी गुप्त, चंद्रिका प्रसाद ‘कीर्ति’, उमाशकंर पांडेय, चंद्रपाल कश्यप, विजय शर्मा, हारिस जमां खां आदि उपस्थित रहे।
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