Jeev can change fate by his actions
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खप्टिहा कलां। सिद्धपीठ पाथादाई मंदिर में चल रही सात दिवसीय संगीतमयी श्रीमद्भागवत महापुराण का शनिवार को समापन हो गया। अंतिम दिन कथा व्यास पंडित गौरीशंकर तिवारी ने कृष्ण और सुदामा की मित्रता का वर्णन किया। कहा कि जीव अपने कर्मों से भाग्य को बदल सकता है।
सुदामा साधक पुरुष थे। जिन्होंने अपना जीवन केवल साधना व साध्य के द्वारा जिया। उनका ब्रह्म से मिलन हुआ। कथा व्यास ने श्रीकृष्ण के बाल्य काल का रोचक वर्णन करते हुए कहा कि पूतना भगवान को मारने गई। अर्थात उसके हृदय में कुभाव था, लेकिन कृष्ण के समीप पहुंचते ही यह कुभाव से वात्सल्य भाव उत्पन्न हुआ और कृष्ण की प्राप्ति हुई।
कहा कि जब संसार के विषय को छोड़कर जीव परमात्मा की ओर बढ़ता है तो मुक्ति हो जाती है। कथा व्यास ने अंतिम दिन कृष्ण की माखन लीला, तृणावर्त उद्धार, कंस का उद्धार और रुक्मिणी विवाह की कथा सुनाई।