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Banda News: जेई और बाबू ने हजम किए मुआवजे के 86.40 लाख रुपये

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बांदा। लोक निर्माण विभाग का एक और कारनामा सामने आया है। बाबू और जेई ने बाईपास रोड निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण के पहले भू स्वामी की मौत का फायदा उठाया। वारिसों से पहले भूमि अधिग्रहण के नाम पर रिश्तेदारों के नाम जमीन लिखवाई, फिर सड़क बनने के सालों बाद उसी जमीन का करीब साढ़े 86 लाख रुपये मुआवजा लेकर पीडब्ल्यूडी के नाम दर्ज करा दी। फर्जीवाड़े में तत्कालीन एक्सईएन से लेकर राजस्व विभाग के कर्मचारी भी शामिल हैं। इसकी शिकायत शासन से की गई है। जांच हुई तो कई अधिकारियों और कर्मचारियों की गर्दन नप सकती है।
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बसपा शासनकाल में वर्ष 2008 में शहर में बाईपास रोड का निर्माण कराया था। उस समय किसानों की भूमि अधिग्रहीत कर मुआवजा दिया गया। दुरेड़ी गांव के लोगों की भूमि भी अधिग्रहीत की गई। बाईपास रोड की जद में आई जमीन गाटा संख्या 222 का मालिकाना हक रामसनेही का था, लेकिन उनका निधन हो जाने से वारिसों से संपर्क नहीं हो सका। इस कारण पीडब्ल्यूडी के नाम यह भूमि नहीं दर्ज हो सकी। नियमानुसार मालिक के निधन के बाद इस भूमि के वारिसों के मालिकाना हक पेश करने के बाद मुआवजे की धनराशि उनके खाते में भेजनी चाहिए।



वारिसों के नाम खतौनी में दर्ज होने के बाद लोक निर्माण विभाग के अवर अभियंता सुशील कुमार अपने भाई कर्वी निवासी सुधीर कुमार को लेकर दुरेड़ी के रामसनेही के वारिसों गजराज और सूरज से संपर्क किया। सुशील ने वारिसों को बताया कि आपकी जमीन (गाटा संख्या 222) पर बाईपास रोड बन चुकी है। मुआवजा सरकार ने विभाग में भेजा है। जेई ने वारिसों से यह जमीन पीडब्ल्यूडी के नाम दर्ज कराने के लिए कहा। जेई सुशील ने तत्कालीन एक्सईएन सुमंत कुमार से साठगांठ की। सुशील ने अधिग्रहीत भूमि का बैनामा अपने भाई सुधीर कुमार और पीडब्ल्यूडी के लिपिक विमल वर्मा के भाई अनुज वर्मा के नाम फर्जी तरीके से 14 जनवरी 2020 को करा लिया, जबकि, खसरा में यह जमीन सड़क के नाम दर्ज थी। तत्कालीन लेखपाल, कानूनगो व तहसीलदार की भी मिलीभगत रही। वारिसों को इस जमीन का सिर्फ सात लाख रुपये दिए।
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15 जून 2021 को सुधीर कुमार ने करीब साढ़े चार बिस्वा जमीन प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग के नाम रजिस्ट्री कराई और सर्किल रेट से चार गुना 43 लाख 20 हजार रुपये मुआवजा लिया। इसके बाद छह जुलाई 2021 को सुधीर कुमार ने गाटा संख्या 222 की ही साढ़े चार बिस्वा जमीन फिर लोक निर्माण विभाग के नाम दर्ज कराई और फिर 43 लाख 20 हजार रुपये मुआवजा ले लिया। एक्सईएन की ओर से अधिकृत जेई सुशील कुमार को विक्रय पत्र लिखा गया, जबकि, सरकार की अधिग्रहीत भूमि को सरकार के अलावा कोई बेच नहीं सकता, लेकिन अधिकारियों की साठगांठ से बिना कानूनी अधिकार के रजिस्ट्री की गई। डेढ़ वर्ष बाद पीडब्ल्यूडी के नाम बैनामा कराकर दो किस्तों में करीब साढ़े 86 लाख रुपये हड़प लिए गए। प्रांतीय खंड पीडब्लूडी के अवर अभियंता सुशील सिंह का कहना है कि कुछ कारणों से किसानों को उस समय बाईपास का मुआवजा नहीं दिया गया था, जिन्हें बाद में दिया गया है। कुछ रजिस्ट्री भी बाद में हुई हैं।



शासन से की जांच व कार्रवाई की मांग

जेल रोड जरैली कोठी निवासी पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष सुशील कुमार त्रिवेदी ने इस संबंध में पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता व शासन को पत्र भेजकर मामले में जांच व दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। कहा कि हड़पे गए धन की रिकवरी कराई जाए। आरोप लगाया कि साढ़े चार विस्वा जमीन की दो बार फर्जी ढंग से रजिस्ट्री कराई गई है।



वर्जन

-भूमि अधिग्रहण के बाद किसी व्यक्ति विशेष के नाम रजिस्ट्री नहीं कराई जा सकती है। बाईपास रोड में जमीन अधिग्रहण से संबंधित कोई मामला आएगा तो जांच व कार्रवाई करेंगे। -राजेश कुमार, अपर जिलाधिकारी, बांदा



वर्जन

बाईपास रोड मामले की शिकायत आई है, अभी इसका अध्ययन नहीं किया है। यदि, नियम विरुद्ध सड़क निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण किया गया है तो जांचकर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। -मुकेश शर्मा, मुख्य अभियंता, चित्रकूटधाम मंडल बांदा।
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