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बांदा: जखनी गांव का जल संरक्षण दूसरे राज्यों में बना मॉडल

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जल ग्राम से मशहूर जखनी गांव में खेतों की मेड़बंदी व कुओं का निरीक्षण करते नीति आयोग के जल सलाहकार ? - फोटो : BANDA
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बांदा। जल ग्राम की हकीकत जानने भारत सरकार नीति आयोग के जल सलाहकार अविनाश मिश्रा सोमवार को जखनी गांव पहुंचे। यहां किए गए जल संरक्षण के उपायों, मेड़बंदी आदि का जायजा लिया।
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कहा कि जखनी गांव में परंपरागत जल संरक्षण के लिए अपनाई गई विधियों को दूसरे राज्यों में मॉडल के रूप में लागू किया जा रहा है। वर्षा की बूंद जहां गिरे उसे वहीं रोकें। जिस खेत में जितना पानी होगा, वहां उतनी ही पैदावार बढ़ेगी।
जल सलाहकार ने गांव में भ्रमण कर यहां के किसानों द्वारा बनाए गए मेड़ों को देखा। पानी से भरे गांव के कई तालाब देखें। कुओं का भी जायजा लिया। इस बात पर खुशी जताई कि बिना किसी सरकारी मदद के यहां के किसानों ने अपने श्रम और धन से तालाब, कुओं और परंपरागत जलस्रोतों को बरकरार रखा है।
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जखनी गांव की जल ग्राम समिति के संयोजक उमाशंकर पांडेय सहित समिति के अन्य कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया। कहा कि यहां अद्भुत कार्य हुआ है। अंधेरा-अंधेरा का शोर मचाने के बजाय दीपक जलाया गया है। यहां के किसानों और जवानों की पूरे देश में प्रशंसा हो रही है।
जल सलाहकार ने कहा कि प्रधानमंत्री ने मेड़बंदी और परंपरागत तरीकों से जल संरक्षण के लिए देशभर के प्रधानों को पत्र भेजा है। यह अच्छी बात है कि बुंदेलखंड के किसान दस साल से खेतों में बारिश का पानी रोकने के लिए मेड़बंदी करा रहे हैं। उन्होंने समिति संयोजक उमाशंकर पांडेय से मेड़बंदी संबंधी जानकारी साझा की।
इस अवसर पर गांव के अली मोहम्मद, निर्भय सिंह, प्रेमचंद्र वर्मा, राजाभइया वर्मा, रामचंद्र यादव, रामविशाल कुशवाहा, प्रेमप्रकाश, अजय शिवहरे भी मौजूद रहे। जल सलाहकार अविनाश मिश्रा ने सर्वोदय कार्यकर्ता और पड़ोसी गांव घुरौंडा गांव निवासी गजेंद्र त्रिपाठी से भी मुलाकात की। वहां के परंपरागत जलाशयों आदि को देखा। जाते समय केन नदी का भी पुल से जायजा लिया।
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