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Banda News: रवि काना रिहाई मामले में जेल अधीक्षक भी हुए निलंबित

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-लगातार दूसरे दिन भी मंडल कारागार पहुंची विशेष विवेचनात्मक टीम
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संवाद न्यूज एजेंसी

बांदा। स्क्रैप माफिया और गैंगस्टर रविंद्र सिंह उर्फ रवि काना की रिहाई के मामले में बांदा मंडल कारागार के जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम और निलंबित जेलर विक्रम सिंह यादव सहित अन्य के खिलाफ कोतवाली नगर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 260सी के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस मामले में अनुशासनात्मक लापरवाही के आरोप में जेल अधीक्षक को भी निलंबित कर दिया गया है।
घटना के संबंध में बांदा की विशेष विवेचनात्मक टीम ने मंडल कारागार पहुंचकर रिहाई के समय के सीसीटीवी फुटेज और रवि काना के रवाना होने में प्रयुक्त गाड़ी के फुटेज जुटाए हैं। गैंगस्टर रवि काना पर नोएडा के सेक्टर-63 थाने में वसूली समेत अन्य धाराओं में मामले दर्ज थे। वह वर्ष 2024 से बांदा मंडल कारागार में बंद था। वसूली मामले में बी-वारंट के तहत उसे न्यायालय में तलब किया गया था। 29 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी के बाद उसी दिन शाम को उसे रिहा कर दिया गया था।
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गौतमबुद्धनगर द्वारा डीजी जेल और जेल अधीक्षक से जवाब मांगे जाने के बाद, डीजी जेल पीसी मीणा ने डीआईजी जेल प्रयागराज रेंज राजेश श्रीवास्तव को जांच सौंपी थी। इसी क्रम में जेलर विक्रम सिंह यादव को निलंबित किया गया था। इसके बाद, जेल चौकी प्रभारी अनुराग पांडेय ने उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जेल अधीक्षक और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई, जिसके फलस्वरूप जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम को भी निलंबित कर दिया गया। पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज के नेतृत्व में एक विशेष विवेचनात्मक टीम गठित की है, जो घटना के हर पहलू की गहनता से जांच कर रही है।



जिस गाड़ी से बैठकर रवि काना रवाना हुआ, उसके भी फुटेज मिले

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज के नेतृत्व में एक विशेष विवेचनात्मक टीम गठित की है। टीम ने लगातार बुधवार को भी मंडल कारागार पहुंचकर रवि काना की रिहाई के समय के सीसीटीवी फुटेज, कौन सी गाड़ी रवि काना को लेने आई थी, उसके फुटेज इकट्ठा किए हैं। विवेचनात्मक टीम में सीओ बबेरू सौरभ सिंह, कोतवाली इंस्पेक्टर बलराम सिंह, एसओजी प्रभारी आनंद कुमार मंडल कारागार पहुंचे थे। उन्होंने पूरे प्रकरण की गहनता से जांच की है। विवेचक ने टीम की मौजूदगी में सभी सुबूत इकट्ठा किए हैं।





वर्जन







इस संवेदनशील प्रकरण को देखते हुए विशेष विवेचनात्मक टीम अपर पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में गठित की है। टीम ने दूसरे दिन भी हर पहलू पर गहनता से जांच की है कि किन परिस्थितियों में अभियुक्त को रिहा किया गया है।-पलाश बंसल, पुलिस अधीक्षक, बांदा।





जेल अधीक्षक ने यह दिया था बयान

निलंबित जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम ने डीआईजी प्रयागराज जोन राजेश श्रीवास्तव के समक्ष बयान दिया था कि रंगदारी मांगने व धमकाने में रवि काना के विरुद्ध कोई कस्टडी वारंट पूर्व में नहीं रहा। उसके खिलाफ दर्ज अन्य मुकदमों में रिहाई के आदेश पूर्व में हो चुके थे। गैंगस्टर के आखिरी मामले में भी 28 जनवरी की सुबह रिहाई के आदेश हो चुके थे। रंगदारी मांगने के मामले में बी वारंट किया गया था। जिसमें वीडियो कांफ्रेसिंग से पेशी करा दी गई थी। रिहाई के समय तक कस्टडी वारंट न होने व अन्य कोई आदेश न्यायालय से उन्हें प्राप्त नहीं हुआ था। इससे सामान्य तौर पर उसकी अन्य बंदियों की तरह रिहाई की गई है।



मुख्तार के बाद अब रवि काना को लेकर जेल सुर्खियों में

बांदा। स्क्रैप माफिया रवि काना की रिहाई के मामले जेल अधीक्षक और जेलर के निलंबित होने से एक बार फिर बांदा का मंडल कारागार सुर्खियों में है। पूर्वाचल के माफिया मुख्तार अंसारी की मौत के बाद मंडल कारागार की स्थितियां शांत थीं, लेकिन गैंगस्टर रविंद्र नागर उर्फ रवि काना के अगस्त 2024 से 29 जनवरी 2026 तक यहां निरुद्ध रहने के दौरान जेल की गतिविधियों में फिर बदलाव देखा गया।



बताया जाता है कि रवि काना अपने 16 माह के कारावास के दौरान बैरक नंबर तीन-ए में निरुद्ध रहा। यहां उसके साथ 24 से 25 अन्य बंदी भी रखे गए थे। सूत्राें का कहना है कि कई बंदी उसकी सेवा में लगे रहते थे। रवि काना का रहन सहन और पहनावा भी सामान्य बंदियों से अलग रहता था। हालांकि इस संवेदनशील प्रकरण में जांच चल रही है।

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रवि काना से मिलने के लिए सिर्फ 10 लोगों को थी अनुमति



बांदा। रवि काना के बांदा जेल में स्थानांतरित किए जाने के बाद से सिर्फ 10 लोगों को उससे मिलने की अनुमति थी। इसमें उसकी पत्नी, अधिवक्ता व एक मित्र शामिल था। मुलाकात भी एलआईयू के सामने कराई जाती थी। बिना किसी आदेश के रवि काना को रिहा किए जाने की घटना में कहीं न कहीं चूक तो हुई है। सूत्रों के मुताबिक, रिहाई के समय दो सफेद रंग की कारें पहले से जेल गेट पर मौजूद थीं। एक कार में एक महिला और दूसरी में तीन युवक बैठे बताए गए थे। बताया जा रहा है कि इनमें रवि काना की बहन और उसका चचेरा भाई शामिल रहा। जेल से बाहर आते ही रवि काना अपना सामान कार में रखकर बिना किसी देरी के तुरंत रवाना हो गया था।
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जेल अधीक्षक का बयान और जेल की स्थिति



निलंबित जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम ने डीआईजी प्रयागराज जोन को दिए बयान में कहा था कि रिहाई के समय तक उनके पास कोई कस्टडी वारंट या अन्य न्यायालयीन आदेश प्राप्त नहीं हुआ था, जिससे सामान्य प्रक्रिया के तहत रिहाई की गई। इस घटना के बाद बांदा मंडल कारागार एक बार फिर सुर्खियों में है, जो पहले भी माफिया मुख्तार अंसारी जैसे कैदियों के कारण चर्चा में रहा है। रवि काना अपने 16 माह के कारावास के दौरान बैरक नंबर तीन-ए में निरुद्ध रहा, जहां उसका रहन-सहन सामान्य बंदियों से अलग बताया जाता है। सूत्रों के अनुसार, रिहाई के समय जेल गेट पर दो सफेद कारें मौजूद थीं, जिनमें उसके परिजन सवार थे।
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