Irrigation will be done by pouring water of Ken river into Gahar drain
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नरैनी/करतल। यूपी-एमपी के सरहद वाले गांव से निकले गहरार नाले को केन नदी के पानी से भरने की कवायद जारी है। बांदा के बिल्हरका गांव में पट चुके नाले को जेसीबी से खोदा जा रहा है। गुरुवार को यह कार्य देखने पहुंचे डीएम अनुराग पटेल ने खुद जेसीबी की स्टेयरिंग संभाल ली और कुछ देर खोदाई की। नाले में दो चेकडैम निर्माण के लिए स्थान चिह्नित करने के निर्देश दिए।
मध्य प्रदेश की घाटियों से निकलकर बांदा के कई गांवों तक आए गहरार नाले से कई गांवों की सैकड़ों बीघा भूमि को सिंचाई का पानी मिल सकता है। इसी मंशा से पिछले दिनों विश्व पृथ्वी दिवस (22 अप्रैल) से इस नाले की खोदाई और सफाई का काम चल रहा है। डीएम ने सिंचाई विभाग अभियंताओं को निर्देश दिया कि नाले से केन नदी की दूरी का सर्वे कर लें। बारिश में नदी का पानी नाले में लिफ्ट कर खेतों तक पहुंचाया जाएगा। हालांकि सिंचाई विभाग अधिकारियों ने बताया कि नाले के लेवेल से केन नदी 26 मीटर नीचे है। लेकिन लिफ्ट केनाल बनाकर नदी का पानी नाले में चढ़ाया जा सकता है। लघु सिंचाई के सहायक अभियंता प्रमोद कुमार मिश्रा को डीएम ने दो चेकडेम के लिए शीघ्र स्थान चयनित करने को कहा।
उधर, लौलास गांव के राजू, अंगद, जयराम यादव आदि ने डीएम को बताया कि नाला उनकी भूमिधरी पर खोदा जा रहा है। उन्होंने इसे रोकने की मांग की। डीएम ने उन्हें यह कहकर शांत कर दिया कि नाले के पानी से उनके खेतों की भी सिंचाई होगी। पन्ना डीएम से भी बात की जा रही है। पिछले दिनों यहां खोदाई में विधायक ओममणि वर्मा सहित तमाम अधिकारियों ने श्रमदान किया था। निरीक्षण के दौरान सीडीओ वेद प्रकाश मौर्य, एसडीएम नरैनी राघवेंद्र सिंह, तहसीलदार परशुराम, वीडीओ आदि उपस्थित रहे।