बांदा। बेल्जियम सरकार के कृषि सलाहकार जोहान डी
हस्टलर ने कहा कि भारत की कृषि आज भी नायाब है। इस देश को कृषि प्रधान कहा
जाना बिल्कुल ठीक है।
कहा कि वे कई बार भारत आ चुके हैं। हर बार यहां से कुछ न कुछ खेती के गुर सीखे और उसे बेल्जियम में किसानों को सिखाया और बताया।
मुख्यालय
से करीब 20 किलोमीटर दूर सदर तहसील के छनेहरा लालपुर गांव में शनिवार को
किसान गोष्ठी हुई। बेल्जियम सरकार के कृषि सलाहकार जोहान डी हस्टलर ने कहा
कि भारत में उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है।
जर्मन के कृषि विशेषज्ञ डॉ. उलर्के ने कहा कि भारत के किसानों की अमूल्य मेहनतकारी और सफल खेती यहां की पहचान है।
प्रगतिशील
किसान प्रेम सिंह (बड़ोखर खुर्द) कहा कि अंधाधुंध मशीनीकरण और खाद की होड़
ने खेती को मटियामेट और किसान को नाकारा कर दिया है। पुरानी परंपराओं से
खेती की जाए तो आज भी यह तकदीर और तस्वीर बदल सकती है। उन्होेंने अपने कृषि
फार्म का उदाहरण भी दिया।
गोष्ठी के मेजबान किसान मजहरुल हसन
(छनेहरा) ने कहा कि किसानों को खेती के नए तौर-तरीके के प्रति रुझान दिलाने
के लिए ऐसी गोष्ठियां भविष्य मेें भी की जाएंगी। उन्होंने सभी का आभार
जताया।
गोष्ठी के संयोजक राशिद सिद्दीकी ने भी संबोधित किया।
संचालन गुंजन मिश्रा और पुष्पेंद्र भाई ने किया। इस अवसर पर किसान और
अधिवक्ता शेख सादी जमां, बांदा इंटेक चेप्टर के हारिस जमां खां, आरएस
खेंगर, सैय्यद अल्तमश, आरिफ, इरशाद, नौशाद, मुमताज अली, जितेंद्र शर्मा,
पुनीत खन्ना इत्यादि शामिल रहे।
उधर, इस मौके पर गोष्ठी आयोजक
मजहरुल हसन द्वारा साइकिल में तैयार किया गया हल आकर्षण का केंद्र रहा।
उन्होंने बताया कि खेत में इस हल को साइकिल की तरह चलाकर जुताई करते हैं।