बांदा। जिले में सहकारी समितियों को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इन समितियों को अब केवल खाद और बीज बेचने तक सीमित न रखकर, बहुउद्देशीय वी-पैक्स के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत, सहकारी समितियां जन सेवा केंद्र, फोटो स्टेट कॉपी सेंटर, कीटनाशक दवा बिक्री और विशेष रूप से प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र जैसी विभिन्न सेवाएं प्रदान करेंगी।
जिले में कुल 117 सहकारी समितियां कार्यरत हैं। इनमें से पांच समितियों में पहले से ही जन सेवा केंद्र और प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए, अब सात और सहकारी समितियों को प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोलने के लिए चिह्नित किया गया है। इन केंद्रों के लिए लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया जारी है।
प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों को ब्रांडेड दवाओं की तुलना में काफी कम कीमत पर आवश्यक दवाएं उपलब्ध होंगी। यह कदम विशेष रूप से उन लोगों के लिए राहत भरा होगा जिनकी आय सीमित है और जो महंगी दवाओं का खर्च वहन करने में असमर्थ हैं। सहकारी समितियों को बहुउद्देशीय समिति वी-पैक्स का नाम दिया गया है, जो उनके विस्तारित स्वरूप को दर्शाता है।
सरकार ने भी समितियों को आय बढ़ाने के लिए खाद-बीज के अतिरिक्त अन्य कार्यों को अपनाने के आदेश जारी किए हैं। इस दिशा में, जन औषधि केंद्र, जन सेवा केंद्र और कीटनाशक दवा बिक्री जैसे कदम महत्वपूर्ण साबित होंगे।
संचालित बहुउद्देशीय सहकारी समितियां
बहुउद्देशीय सहकारी समिति बदौसा, बिसंडा, तिंदवारी, जसपुरा, पलरा
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भविष्य के लिए चयनित बहुउद्देशीय समितियां
समिति का नाम
गोखिया
ओरन
चिल्ला
तिंदवारी उत्तरी
खुरहंड
नरैनी
कालिंजर
वर्जन-
समितियों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे है। पांच समितियों में जन औषधि केंद्र खोले जा चुके हैं। सात में और खोलने की प्रक्रिया चल रही है।
- असंल कुमार, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक समितियां, बांदा