टिकट बुकिंग हाईटेक होते ही कई चुनिंदा और मशहूर स्टेशन रेलवे की सूची से गायब हो गए हैं। इनमें बांद्रा-बंगलुरू जैसे स्टापेज के नाम भी शामिल हैं। इन स्टेशनों के लिए यहां यात्रियों को टिकट नहीं मिल पा रहा।
बांदा ‘ए’ श्रेणी रेलवे स्टेशन में शामिल है। यहां से रोजाना बड़ी संख्या में देश के विभिन्न महानगरों के लिए यात्री जाते और आते हैं। उन्हें बुकिंग खिड़की पर कंप्यूटराइज्ड सिस्टम से टिकट/आरक्षण जारी किया जाता है, लेकिन यह बड़ी हैरत की बात है कि रेलवे के कंप्यूटर से लगभग डेढ़ दर्जन मशहूर रेलवे स्टेशन गायब हैं।
इनमें बांद्रा टर्मिनल (मुुंबई), बंगलुरू, उदरपुर सिटी, आनंद बिहार आदि शामिल हैं। ऐसे ही करीब 15 स्टेशन बताए गए हैं जो रेलवे के कंप्यूटर में फीड नहीं है जबकि यहां जाने वाले यात्रियों की यहां खासी तादाद है।
बुकिंग कांउटरों पर इन स्टेशनों का टिकट मांगे जाने पर बुकिंग क्लर्क पहले तो टिकट देने से हाथ खड़ा कर देते हैं और कोई यात्री अगर अड़ गया तो इन स्टेशनों के आसपास का कोई स्टेशन पूछते हैं। वह स्टेशन कंप्यूटर में दर्ज होने पर वहां का टिकट बना दिया जाता है। यदि ऐसा नहीं हो पाता तो यात्री को टरका दिया जाता है।
कंप्यूटर से टिकट न बन पाने की स्थिति में रेलवे ने यह भी वैकल्पिक व्यवस्था कर रखी है कि ऐसे यात्री को बीपीटी (ब्लैंक पेपर टिकट) सिस्टम से टिकट जारी कर दिया जाए, लेकिन निर्धारित प्रारूप पर हाथ से टिकट जारी करने की झंझट बुकिंग काउंटर पर बैठे रेल कर्मी नहीं करते।
उधर, यह भी पता चला है कि जिन स्टेशनों के टिकट ज्यादा बिकते हैं, उन्हीं का कंप्यूटर में फीड कर रखा गया है। कम संख्या में बिकने वाले टिकटों के स्टेशनों को कंप्यूटर में फीड कराने की जरूरत रेल कर्मी महसूस नहीं करते। खामियाजा इन लंबी दूरी के स्टेशनों का टिकट खरीदने वालों को भुगतना पड़ता है।
इस संबंध में उत्तर मध्य रेल, बांदा के मुख्य वाणिज्य पर्यवेक्षक एसडी
पाराशर बताते हैं जो स्टेशन कंप्यूटर से गायब हैं उन्हें खोजा जा रहा है।
दरअसल इनकम के हिसाब से स्टेशनों को अपडेट कराया जाता है।
कंप्यूटर से गायब
स्टेशनों का टिकट बनाने की जिम्मेदारी बुकिंग क्लर्क की होती है। कंप्यूटर
पर उपलब्ध नहीं है तो यात्री को बीपीटी सिस्टम से टिकट जारी कराया जाएगा।
बांदा रेलवे कंप्यूटर सूची से नदारद हैं ये स्टेशन
यशंवतपुर, उदरपुर सिटी, बंगलुरू, बांद्रा टर्मिनल, गुना, काछीगुणा, छिवकी, नौतंवां, आनंद बिहार, चित्तौड़गढ़, भिलवाड़ा, दौसा, करनल टाउन, बंगलौर कैंप, मनकापुर आदि।