बांदा। महर्षि वामदेव और नवाब की नगरी बांदा नवरात्र और मोहर्रम पर एक साथ फिर एक बार गंगा-जमुनी तहजीब से गुलजार है। नवरात्र पर जगह-जगह दुर्गा प्रतिमा पंडालों से गूंज रहे देवी गीत तो दूसरी तरफ ताजिया जुलूसों में बज रहे ढोल-ताशे और इमामबाड़ों में मरसिया-मातम की सदाएं सबक दे रही हैं कि यह शहर सांप्रदायिक सौहार्द का नायाब नमूना है। देवी पंडाल की रोशनी से गुजरते समय ताजिये भी जगमगा उठे।
कौमी एकता के लिए बांदा देश और प्रदेश में हमेशा उदाहरण रहा है। यह शोहरत आज भी बरकरार है। मौजूदा समय में मोहर्रम और नवरात्र के एक साथ पड़ने पर प्रशासन और पुलिस चौकसी और एहतियात की बातें कर रहे हैं वहीं बांदा के बाशिंदे उनकी इन चिंताओं पर पानी फेर रहे हैं। नवरात्र चार दिनों पूर्व शुरू हो चुकी है।
बृहस्पतिवार को मोहर्रम भी शुरू हो गया। देर रात ताजिया जुलूस निकला। जुलूस के रूट पर कई स्थानों पर दुर्गा प्रतिमा पंडाल सजे हैं। यहां एक तरफ देवी गीतों की गूंज और श्रद्धालुओं के दर्शन का सिलसिला जारी था तो दूसरी तरफ वहां से गुजर रहे ताजिया जुलूस में मातमी सदाएं अकीदतमंदों को शहीदाने कर्बला की याद दिला रही थी। देवी पंडाल में लगी बिजली की सजावट से ताजिया गुजरा तो और जगमगा उठा। उधर, इमामबाड़ों में ढोल-ताशे के रस्मी बाजे और मजलिसों में मरसिए और नौहाखानी गूंज रहे हैं।