तिंदवारी थाना क्षेत्र के जसईपुर गांव में महाशिवरात्रि के साथ दीवाली भी मनाई गई। एक खबर ने पूरे गांव में जश्न का माहौल पैदा कर दिया। इस गांव के चार मछुआरे शिवरात्रि के शुभ मौके पर पाकिस्तानी जेल से रिहा कर दिए गए। टीवी पर खबर आते ही चारों के घरों में खुशियां बरस पड़ीं। दिन में दीप जलाकर दीवाली मनाई।
किसी ने पिता की रिहाई पर देवताओं को पूजा तो किसी ने पति की अगवानी के लिए घर को रंगोली से सजा लिया है। दो-तीन दिनों बाद पांचो मछुआरे अपने घरों को पहुंच जाएंगे। इन सभी को पिछले वर्ष 14 मार्च को ओखा (गुजरात) समुंदर में मछली मारते समय पाकिस्तानी सीमा में दाखिल हो जाने पर पाक फौज ने गिरफ्तार कर लिया था। तब से वह जेल में थे।
पत्नी ने ड्योढ़ी पर दिन में जलाए दीपक
पाक जेल से रिहा हुए शिवशरण पुत्र किशोर की मां मेड़िया देवी बेहद खुश है। कहा कि उसे जैसा लग रहा है जैसे बेटे का दोबारा जन्म हुआ हो। पत्नी चंदा बाई खुशी से फूल नहीं समा रही। उसने घर की ड्योढ़ी पर दिन में दीपक जलाकर दीवाली मनाई।
बताया कि पिछले वर्ष जनवरी माह में उसके पति पत्नी बेटी अमृता की शादी तय करने के बाद शादी के लिए पैसा कमाने परदेश गए थे। खुशियों के साथ अफसोस के आंसू भरकर चंदा बाई ने बताया कि कहां तक इंतजार करते? पांच दिनों पूर्व 10 फरवरी को ही बेटी की शादी कर दी है। काश! यह रिहाई आठ दिन पहले हो जाती।
शादी के छह माह बाद ही पति से हो गई थी दूर
शादी के सिर्फ छह माह बाद ही पति से दूर हो गई रेनू खुशी से उछल पड़ी। उसका पति विक्रम पाक जेल से रिहा हो गया। रेनू ने बताया कि शादी की मेंहदी हाथों से छूटी नहीं थी और पति कमाने के लिए चला गया।
मार्च 2014 को उसके पति को पाक पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। तब से वह रोजाना भगवान शंकर की बराबर पूजा करके अपने सुहाग की सलामती मांग रही थी। रेनू ने बताया कि शिवरात्रि पर उसने व्रत भी रखा था। भगवान शंकर ने उसकी सुन ली और उसी दिन उसे खुशखबरी मिल गई।
बेटी ने घर सजाकर की पूजा पाठ
धनराज पुत्र मइयादीन के घर में भी खुशियां हैं। उसकी पुत्र अनीशा पापा की रिहाई से बेहद गद्गद् है। बुधवार को उसने अपने कमरे में देवी-देवताओं और अन्य आकर्षक पोस्टर से सजाया। अगरबत्ती सुलगाकर श्रीकृष्ण और अन्य देवताओं के चित्रों के सामने पूजा की।
अनीशा ने बताया कि बृहस्पतिवार से उसकी हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा है, लेकिन पिता की रिहाई की खुशी में फिलहाल उसने पढ़ाई को ब्रेक करके पापा की अगवानी के लिए घर साफ-सुथरा किया है। पकवान और मिठाई बनाने के लिए मां प्रेमा देवी बाजार गई है। अनीशा ने बताया कि उसके पिता 340 दिन बाद पाकिस्तानी जेल से रिहा हुई है।
दूसरी बार रिहा हुआ है मछुआरा संतोष
75 वर्षीय परसन का पुत्र संतोष दूसरी बार पाकिस्तानी जेल से रिहा हुआ है। इसके पूर्व दो भाई छोटेलाल व राजू भी संतोष के साथ 32 माह तक पाक जेल में रहे थे। तब भी समुंदर मछली पकड़ने के दौरान वे पकड़े गए थे। अगस्त 2010 में तीनाें की रिहाई हुई। अबकी सिर्फ संतोष पकड़ा गया था।
माता-पिता ने बताया कि मंगलवार की रात पड़ोसी दुकानदार शिवशरन खुशी के मारे चीखता हुआ आया और उन्हें खबर दी कि गांव के बेटे रिहा हो गए हैं। पति के गांव लौटने से पहले उसके लिए पत्नी फूलमती ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। घर के दरवाजे को रंगीन गोबर और मिट्टी से लीपापोता है। इसमें रंगोली बना रही है।
यूपी सरकार से मछुआरों को मलाल
पाकिस्तानी जेल से रिहाई की खबर के बाद जसईपुर के चारों मछुआरों के घर न सिर्फ पड़ोसियों बल्कि दूरदराज के नातेदारों ने भी आकर खुशी का इजहार किया है। यह सिलसिला जारी है। अलबत्ता ग्रामीणों और मछुआरों के परिवारों को मलाल है कि पाकिस्तान का जुल्म सहकर अपने वतन लौटे उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार कोई तवज्जो नहीं देती।
न ही प्रशासन के किसी अफसर ने सुध ली। पिछली मर्तबा इनकी रिहाई पर ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से खबर छापी थी। उन्होंने बताया कि इसके विपरीत गुजरात सरकार पाकिस्तानी व श्रीलंकाई जेलों में कैद रहे अपने प्रदेश के बाशिंदों को छह हजार रुपये मासिक मदद दे रही है।
कई दिन बाद लौटेंगे अपने गांव
सोमवार की रात पाकिस्तान से रिहा
हुए पांचों मछुआरे फिलहाल अपने गांव नहीं आए हैं। बुधवार को वे दिल्ली में
थे। परिजनों ने बताया कि कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए सभी रिहा
मछुआरे दिल्ली से गुजरात जा रहे हैं।
वहीं उनकी गिरफ्तारी हुई थी। गुजरात
में भी कुछ कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद वतन वापसी होगी। इसमें कई
दिन लग जाएंगे।