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Banda News: पांच साल में अपनों के हाथों 50 जिंदगियां हुई खत्म

Mon, 06 Apr 2026 12:51 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
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बांदा। जिन घरों में कभी हंसी गूंजती थी, वहीं अब सन्नाटा पसरा है। जिन हाथों को सहारा देना था, उन्हीं हाथों ने जान ले ली। जिले में पिछले पांच सालों के भीतर 50 ऐसी वारदातें सामने आई हैं, जहां खून का रिश्ता ही अपनों के खून का प्यासा बन गया। इन घटनाओं ने रिश्तों की बुनियाद को हिला दिया है।
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इन घटनाओं ने समाज में रिश्तों के बदलते स्वरूप और बढ़ती पारिवारिक कलह पर गंभीर सवाल खड़े दिए हैं। पुलिस अभिलेखों के अनुसार अधिकांश घटनाओं के पीछे संपत्ति विवाद, घरेलू कलह, शक, नशे की लत और रंजिश प्रमुख कारण रहे हैं। कई मामलों में मामूली विवाद इतना बढ़ गया कि मामला हत्या तक पहुंच गया। कुछ उदाहरण हैं, इन हत्याओं के पीछे की वजहें अलग-अलग जरूर हैं लेकिन जड़ एक ही है... टूटते रिश्ते।



आज तक नहीं बरामद हुआ शव



10 जनवरी 2026 को पैलानी थाना क्षेत्र के पचकौरी गांव स्थित मायके में रह रही शारदा का पति राजेंद्र नशे का लती था। लत से परेशान होकर पत्नी मायके में रह रही थी। राजेंद्र अपनी ससुराल गया जहां उसने पत्नी से नशा न करने का वादा किया था। रात को वह ससुराल में ही रुका और देर रात अपने इकलौते डेढ़ साल के बेटे कार्तिक को सोते समय उठाकर यमुना नदी के किनारे ले गया था। जहां उसने उसकी गला दबाकर हत्या करके शव नदी में फेंक दिया था। जो आज तक बरामद नहीं हुआ। पुलिस की जांच में नशे की लत के चलते दंपती के बीच विवाद वजह सामने आई।
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शक में सिपाही बना कातिल



15 जनवरी 2026 को बबेरू तहसील के मरका थाना में मरका थाना में तैनात सिपाही गौरव कुमार यादव ने अपनी पत्नी शिवानी और तीन वर्षीय बेटी परी पर लोहे के तवे से हमला कर घायल कर दिया था। इस हमले में बेटी परी की इलाज के दौरान मौत हो गई थी, जबकि पत्नी शिवानी यादव कानपुर में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। वहीं सिपाही ने नदी में कूदकर आत्महत्या कर ली थी। शक और कलह ने सिपाही को पत्नी और बेटी का कातिल बना दिया था। पुलिस जांच में शक के चलते कलह ही वारदात की प्रमुख वजह सामने आई।



संपत्ति के लिए बेटे ने पिता का किया कत्ल



26/27 सितंबर 2025 की रात नरैनी थाना क्षेत्र के हड़हा गांव में एक दिव्यांग किसान मंसूर खान की गोली मारकर हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया था। पहले तो पुलिस रंजिश व अन्य बिंदुओं पर छानबीन करती रही। बाद में पुलिस ने इस प्रकरण की गहनता से की गई जांच में पाया कि मंसूर खान का बेटा मासूक खान ही उसका हत्यारा है। मासूक ने संपत्ति के लालच में पिता की हत्या की थी।



पिता ने बेटे को कुल्हाड़ी से काट डाला



5 अगस्त 2020 की दोपहर तिंदवारी थाना क्षेत्र के ग्राम बेंदा के मजरा भैरम पुरवा निवासी गोपाल सिंह ने मामूली घरेलू विवाद में अपने ही बेटे अनिल सिंह को दिन-दहाड़े कुल्हाड़ी से काटकर मौत के घाट उतार दिया था। पुलिस जांच में सामने आया कि अनिल की पत्नी अपने ससुर की हरकतों से तंग आकर अपने मायके चली गई थी, फिर वह नहीं लौटी थी। जिस कारण से पिता-पुत्र में अक्सर वाद-विवाद होता रहता था। इसी वजह से पिता ने बेटे की निर्मम हत्या की थी।



विशेषज्ञों की राय :



मनोविशेषज्ञ डॉ. विनीत सचान का मानना है कि परिवारों में संवाद की कमी बढ़ रही है। मानसिक तनाव और गुस्सा नियंत्रण से बाहर हो रहा है। नशे की बढ़ती लत सोचने-समझने की क्षमता खत्म कर रही है, अगर समय रहते इन पर ध्यान न दिया गया, तो ऐसे मामले और बढ़ सकते हैं।



तनाव की स्थिति में कानून हाथ में न लें :



ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए समय-समय पर काउंसलिंग और जागरूकता के प्रयास भी किए जा रहे हैं, ताकि परिवारों में संवाद बना रहे और विवाद बढ़ने से पहले ही सुलझाए जा सकें। किसी भी प्रकार के पारिवारिक विवाद या तनाव की स्थिति में कानून हाथ में लेने के बजाय पुलिस या संबंधित विभाग से संपर्क करें, ताकि समय रहते समस्या का समाधान किया जा सके।
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शिवराज, एएसपी
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