खदानों में मशीनों के प्रयोग और अवैध खनन पर रोक संबंधी हाल ही में दिए गए आदेशों पर कड़ाई से अमल न होने पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की दो सदस्यीय बेंच ने बांदा डीएम को खुद हलफनामा पेश करने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट इस पर 23 मार्च को फिर सुनवाई करेगा। बांदा निवासी जगदीश प्रसाद निषाद द्वारा दायर की गई रिट में 26 फरवरी को उच्च न्यायालय ने आदेश दिए थे कि पट्टों पर चल रही खदानों में मशीनों के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए और बाधित अवधि के नाम पर बढ़ाई गई समावधि पर भी रोक लगे।
17 मार्च को इस मामले में फिर हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति शमशेर बहादुर सिंह ने बांदा डीएम को आदेश दिए हैं कि वह इस मामले में खुद हलफनामा दाखिल करें। हाईकोर्ट के चीफ स्टैंडिंग कौंसिल-द्वितीय कमरुल हसन सिद्दीकी और स्टैंडिंंग कौंसिल आलोक कुमार सिंह ने डीएम को भेजे फैक्स में उक्त जानकारी दी है।
साथ ही कहा है कि व्यक्तिगत शपथ पत्र के लिए 23 मार्च के पूर्व हलफनामा दाखिल करने की तैयारी के लिए डीएम खनिज अधिकारी को चीफ स्टैंडिंग कौंसिल से संपर्क करने को कहें।
उधर, प्रवास सोसाइटी के आशीष सागर ने कहा है कि 20 मार्च से होने वाली किसान संसद में जगदीश निषाद द्वारा हाईकोर्ट में दायर की गई रिट को समर्थन दिया जाएगा।
हाईकोर्ट के बाद शासन से भी जांच-पड़ताल के आदेश
बांदा। जिला पंचायत के टेंडर मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा प्रमुख सचिव को दिए गए आदेशों के बाद अब प्रदेश सरकार ने भी जिला पंचायत अध्यक्ष पर लगाए गए वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
जिला पंचायत सदस्य भानु प्रताप सिंह ने हाल ही में हाईकोर्ट में रिट दायर करके जिला पंचायत के वर्तमान के अध्यक्ष के अनुमोदन पर राज्य वित्त आयोग से 483 लाख और जिला निधि से 203 लाख रुपये के कामों के टेंडर जारी करने पर तमाम अनियमितताओं की शिकायतें की थीं।
इस पर हाईकोर्ट की दो सदस्यीय बेंच ने 27 फरवरी को प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव (पंचायतीराज) को आदेश दिया था कि इस मामले में यदि संभव हो तो दो माह के अंदर कार्रवाई करें। उधर, सदस्य भानु प्रताप ने प्रमुख सचिव को भी शिकायती पत्र देकर तमाम गंभीर आरोप लगाए थे।
मंगलवार को प्रदेश सरकार के संयुक्त सचिव (पंचायतीराज अनुभाग-2) अश्वनी कुमार श्रीवास्तव ने इस संबंध में जांच के आदेश डीएम को दिए हैं। उन्हें भेजे पत्र में शासन के आदेश का हवाला देकर कहा है कि उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत (प्रमुखों, उप प्रमुखों, अध्यक्ष एवं उपाध्यक्षों का हटाया जाना) जांच नियमावली 1997 के अनुसार मामले की जांच कर 15 दिन में आख्या उपलब्ध कराएं।