जिला पंचायत सदस्य इशरत रईस की शिकायत भी टेंडर रोकने में रंग लाई। उन्होंने पंचायत राज्य मंत्री और मंडलायुक्त को दिए शिकायती पत्र में कहा था कि जिला पंचायत अध्यक्ष ने राज्य वित्त आयोग एवं जिला निधि से 686 लाख रुपये लागत के कार्यों के टेंडर प्रकाशित कराएं हैं। उसमें उस शासनादेश की अनदेखी की गई है जिसमें कहा गया है कि प्रदेश सरकार की हर योजना में 20 फीसदी आरक्षण/मात्राकरण अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्रों का हो।
इशरत रईस ने कहा कि जारी किए गए टेंडर में अल्पसंख्यक क्षेत्र में मात्र 11 लाख के ही विकास कार्य शामिल हैं। यह भी आरोप लगाया है कि अध्यक्ष ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में 79 लाख और बसपा डीडीसी बलवंत सिंह के क्षेत्र में 50 लाख, गजेंद्र सिंह के क्षेत्र में 48 लाख, कुसमा देवी के क्षेत्र में 54 लाख, ममता राजपूत के क्षेत्र में 30 लाख, सीता सिंह के क्षेत्र में 40 लाख, शांती साहू के क्षेत्र में 31 लाख, फूलारानी के क्षेत्र में 23 लाख, कमलेश श्रीवास के क्षेत्र में 27 लाख, रामकृपाल पटेल के क्षेत्र में 29 लाख और राजकुमार के क्षेत्र में 26 लाख के कार्यों के टेंडर आमंत्रित किए हैं।
अन्य सदस्यों के क्षेत्रों की अनदेखी की गई है। कहीं किसी सदस्य के क्षेत्र में कोई कार्य नहीं प्रस्तावित है तो किसी के क्षेत्र में मात्र 5 लाख के काम शामिल हैं। यह भी आरोप लगाया कि प्रकाशति टेंडर जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में पारित नहीं है। मंडलायुक्त ने इस मामले में रिपोर्ट तलब की है।
विकास कार्यों में सपा बसपा आमने-सामने
बांदा। जिला पंचायत में सपा और बसपा के बीच बने 36 के आंकड़े से विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। अविश्वास प्रस्ताव से जिला पंचायत अध्यक्ष पद गंवा बैठे सपा नेता नवनिर्वाचित बसपा अध्यक्ष की राह में रोड़े अटका रहे हैं।
नए अध्यक्ष द्वारा जिले में विभिन्न 102 निर्माण/विकास कार्यों के लिए जारी किए गए टेंडर पर मंडलायुक्त ने फिलहाल रोक लगा दी है। अश्विास प्रस्ताव लाकर सदस्यों ने सपा के अध्यक्ष महेंद्र सिंह वर्मा को हटाकर को उपचुनाव में बसपा के बल्देव वर्मा की ताजपोशी कर दी।
20 जनवरी को बल्देव वर्मा ने शपथ लेकर अध्यक्ष पद संभाल लिया। उसी के बाद पूरे जनपद में विभिन्न विकास/निर्माण कार्यों के लिए राज्य वित्त आयोग और जिला निधि से छह करोड़ से ज्यादा लागत के कार्यों के टेंडर जारी कर दिए। टेंडर का प्रकाशन अखबारों में होने के बाद तत्कालीन मंडलायुक्त मुरलीधर दुबे ने रोक लगा दी।
आयुक्त ने जिला पंचायत के मुख्य अधिकारी से कुछ बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगते हुए कहा है कि तब तक टेंडर प्रक्रिया रोक रखी जाए। सूत्र बताते हैं कि मंडलायुक्त से सपा नेताओं ने शिकायत की थी।