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गेहूं बेचने का पैसा मिले तो करें बेटी की शादी

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If you get money to sell wheat, then marry your daughter - फोटो : BANDA
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बांदा। सरकारी क्रय केंद्रों में गेहूं बेचने वाले चित्रकूटधाम मंडल के 480 किसान अपनी गेहूं की कीमत 5.56 करोड़ रुपये हासिल करने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। किसी के घर शादी है तो कहीं बारिश से पहले मकान की मरम्मत का खर्च है। 72 घंटे भुगतान का सरकारी फरमान सिर्फ कागजी साबित हो रहा है। पैसे मिलें तो जरूरतमंद बेटी की शादी और बीमार का इलाज करा सकें।
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चित्रकूटधाम मंडल में गेहूं खरीद का लक्ष्य 2.4 लाख मीट्रिक टन है। 30 जून तक खरीद होनी है। अब तक मंडल में महज 17,728 मीट्रिक टन लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 8.69 फीसदी ही गेहूं की खरीद हो सकी। उधर, जिन किसानों ने गेहूं बेचा है वह भुगतान के लिए भटक रहे हैं। सबसे ज्यादा चित्रकूट में 2.72 करोड़ बकाया है। बांदा में किसानों का 2.34 करोड़ बाकी है।
चार्ट -
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क्रय केंद्रों में किसानों का बकाया (लाख में)
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जनपद किसान बकाया (करोड़ रुपये)
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बांदा 210 234.16
हमीरपुर 30 26.18
महोबा 15 21.40
चित्रकूट 225 272.37
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केस-1
पचनेही गांव के किसान रामभरोसे का कहना है कि मंडी समिति में स्थित पीसीएफ क्रय केंद्र में एक माह पहले 65 क्विंटल गेहूं बेचा था। अभी तक खाते में पैसा नहीं आया। 27 जून को बेटी की शादी है।
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केस-2
मवई गांव के किसान चुनकाई का कहना है कि पीसीएफ क्रय केंद्र में 14 मई को 46 क्विंटल गेहूं बेचा था। अभी तक भुगतान नहीं हुआ। बाबा सच्चिदानंद की तबियत खराब है। उन्हें दिखाने के लिए कानपुर जाना है, लेकिन पैसा न होने से वह इलाज को नहीं जा पा रहे हैं।
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वर्जन-
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पीसीएफ व भारतीय खाद्य निगम के अधिकारियों को लिखा गया है कि वह किसानों का भुगतान जल्द करें। भुगतान न होने की दशा में शासन को लिखा जाएगा।
- संजीव कुमार, संभागीय खाद्य नियंत्रक
चित्रकूटधाम मंडल, बांदा
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