बांदा। 16 फरवरी को बेटी की शादी है और 30 जनवरी को तिलक लेकर जाना है। सभी तैयारियां करनी हैं। 15 दिन से क्रय केंद्र में पडे़े हैं लेकिन तौल नहीं हो रही है। धान बिक्री के रुपयों से शादी की खरीदारी करना चाहते हैं लेकिन अब लग रहा है कि सरकारी केंद्र पर धान बिकेगा ही नहीं, यह दर्द बयां किया जमुनीपुर (महोखर) गांव के किसान संतू ने। वह मंडी समिति में खुले धान क्रय केंद्र पर धान लेकर डेरा डाले हैं।
जौरही गांव के किसान शोभित ने का भी धान नहीं बिक रहा है। वह 10 दिसंबर से क्रय केंद्र पर धान लेकर पड़े हैं। शोभित ने बताया कि दादा सुमित सिंह को कैंसर है। इलाज के लिए धान बेचने आए हैं। धान बिके और रुपये मिलें तो दादा को लेकर कानपुर जाएं। बिक्री की उम्मीद में घर से रुपये खर्च हो रहे हैं। तौल न होने से एक बार टोकन रद हो चुका है। अब पांच जनवरी का टोकन मिला है।
टोकन 10, खरीद सिर्फ पांच किसानों से
प्रत्येक सरकारी क्रय केंद्र पर रोजाना 10 किसानों को धान खरीद के टोकन दिए जा रहे हैं। एक टोकन पर 60 क्विंटल तक खरीद होती है। केंद्रों पर दिन भर में बमुश्किल पांच किसानों के धान की ही तौल हो पाती है। फतपुरवा के किसान रामप्रताप ने बताया कि क्रय केंद्र पर अलाव की व्यवस्था भी नहीं है। अपने पास से रुपये खर्च कर अलाव जला रहे हैं। किसान संजय ने बताया कि मंडी समिति परिसर में अन्ना पशुओं की भरमार है। अन्ना पशु धान खा जाते हैं। मंडी समिति सचिव प्रदीप रंजन ने बताया कि खरीद केंद्र परिसर में रोज तीन अलाव जलाए जा रहे हैं। वृद्ध किसानों को रात में ठहरने के लिए रैन बसेरा उपलब्ध कराया जा रहा है। वहां के रजिस्टर में किसानों के नाम भी दर्ज हैं।
धान क्रय केंद्रों में कांटे बढ़ाए जा रहे हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों के धान की तौल की जा सके। टोकन व्यवस्था से सब चरमरा गया है। एक केंद्र में पांच ट्राली से ज्यादा धान की तौल नहीं हो पाती है। कूपन 10 ट्राली के निकल रहे हैं। टोकन के बावजूद पांच किसानों के धान की तौल नहीं हो पाती है।
-सीपी पांडेय, डिप्टी आरएमओ
तौल न होने से किसान परेशान
करतल। पीसीएफ के धान खरीद केंद्र पर भी टोकन वाले सभी किसानों के धान की तौल नहीं हो पा रही है। रामपुर के किसान भवानीदीन पटेल, प्रेम कुमार, रामलखन, नत्थू लाल और भवानीपुर के देवेंद्र पटेल ने बताया कि टोकन मिलते के बाद भी तौल नहीं हो पा रही है। किसान घर से खाना लेकर आते हैं इसके बावजूद कुछ न कुछ पैसे खर्च हो ही जाते हैं। केंद्र प्रभारी अरुण कुमार ने बताया कि बारदाना (बोरे) मंगाए गए हैं। चर्चा यह भी है कि मध्य प्रदेश के किसान फर्जी रजिस्ट्रेशन कराकर धान बेच रहे हैं। केंद्र प्रभारी ने इससे इंकार किया है।
गांव के रकबे से ज्यादा बिका धान
करतल। केंद्र प्रभारी मुन्नी तिवारी ने बताया कि रामपुर के किसानों से 300 क्विंटल धान की खरीद हो चुकी है। इस गांव में धान का इतना रकबा भी नहीं है। लेखपाल मौके पर जाए बिना रिपोर्ट लगा रहे हैं। किसानों के टोकन पर व्यापारी धान बिक्री का दबाव बना रहे हैं। नरैनी एसडीएम ने कहा कि जांच कराई जाएगी। लेखपाल ने अगर गलत रिपोर्ट लगाई है तो कार्रवाई की जाएगी।
जारी होती पांच टोकन, खरीद केवल दो से
नरैनी। धान खरीद केंद्रों में रोजाना पांच टोकन जारी होती हैं और दो किसानों की ही खरीद हो पाती है। तीन किसान लौटते हैं। उन्हें दोबारा टोकन लेना पड़ रहा है। पीसीएफ क्रय केंद्र में धान लेकर पहुंचे किसान वीरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि 27 दिसंबर का टोकन मिला था। चार और किसान थे। केंद्र प्रभारी ने दो किसानों का धान तौला और तीन को लौटा दिया। उनके धान की तौल भी नहीं हो पाई थी। केंद्र पर पड़े तेरा-ब के किसान नत्थू द्विवेदी, रामचंद्र, बब्बू सविता व बसराही के किसान बाबू पटेल का कहना है कि प्रतिदिन ट्रैक्टर भाड़ा सहित 1400 रुपये खर्च आ रहा है। (संवाद)
तीन बार टोकन निरस्त, तौल नहीं हुई
अतर्रा। किसान अरविंद (गर्गपुर), रामखेलावन (हस्तम), रविकांत पांडेय (तेरा), विजय पाल (तुर्रा) आदि ने बताया कि एक बार ऑनलाइन टोकन लेने में 100 रुपये खर्च होते हैं। तीन-तीन बार रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं लेकिन खरीद नहीं हुई। ट्रैक्टर ट्राली के भाड़े सहित प्रतिदिन कई सौ रुपये रोज खर्च हो रहे हैं। उधर बदौसा रोड पर विपणन शाखा का एक क्रय केंद्र बंद हो गया है। पीसीएफ का केंद्र संचालित हैं। विपणन निरीक्षक अतर्रा अनुपम उपाध्याय, कृष्णचंद्र शुक्ला ने कहा क्रय नीति बदलने से दिक्कत आ रही है। किसानों के आरोप गलत हैं। एसडीएम विजय प्रकाश तिवारी कहा कि लिखित शिकायत मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।