बांदा। बारिश के मौसम में पानी बिलों में जाने से सांप बाहर निकल आते हैं। इस कारण सर्पदंश की सबसे अधिक घटनाएं जुलाई में ही होती हैं। यदि किसी को सांप डसे तो झाड़फूंक के चक्कर में न पड़ें। सीधे अस्पताल ले जाएं। समय पर इलाज से जान बच सकती है।
इस वर्ष अब तक 100 से अधिक लोगों को सांप डस चुके हैं। लोग अस्पताल न ले जाकर झाड़फूंक कराने के चक्कर में पड़ जाते हैं। जुलाई में झाड़फूंक कराने के चक्कर में पांच लोगों की मौत हो चुकी है। ट्राॅमा सेंटर के ईएमओ डॉ. विनीत सचान का कहना है कि सांप या जहरीले कीड़े के डसने और काटने पर नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल लेकर जाएं। समय पर इलाज के जान बच सकती है।
सरकारी अस्पताल में उपलब्ध हैं एंटी स्नैक वेनम
जिला अस्पताल के औषधि भंडार में तैनात चीफ फार्मासिस्ट राजेश सिंह ने बताया कि यहां 300 एंटी स्नैक वेनम उपलब्ध हैं। जुलाई में अब तक 60 वेनम ट्राॅमा सेंटर इमरजेंसी में भेजे जा चुके हैं। इसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी एंटी स्नैक वेनम उपलब्ध हैं। सीएमओ डॉ. विजेंद्र सिंह ने बताया कि जिले की आठ सीएचसी नरैनी, अतर्रा, बबेरू, जसपुरा, स्योढ़ा, कमासिन, बिसंडा, फतेहगंज में 25-25 वेनम उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि सीएचसी में जरूरत पर उन्हें वेयर हाउस से एंटी स्नैक वेनम उपलब्ध कराया जाता है। एंटी स्नैक वेनम की कोई कमी नहीं है। सीएमओ ने कहा कि झाड़फूंक के चक्कर में पड़कर लोग अपनी जान गवां देते हैंं, जबकि सर्प या जहरीले कीड़े के डसने और काटने पर सीधे नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या फिर जिला अस्पताल पहुंचकर उपचार कराना चाहिए।