महाराजा निषाद राज गुह्य की जयंती पर निषाद नेताआें ने कहा कि समुद्र में पुल बनाने के लिए श्रीराम की सेना में हमारे पुरखे शामिल हुए थे। हमें अपने को पहचानना चाहिए।
रविवार को क्योटरा मोहल्ला स्थित बारात घर में आयोजित निषाद राज जयंती में शोभाराम कश्यप ने कहा कि त्रेता युग में हमारे पुरखे राम की सेना में शामिल होकर समुद्र में पुल बनाने में कामयाब हुए थे। हम सभी उन्हीं महापुरुषों के वंशज हैं। हमें अपने आप को पहचानना चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने निषाद समुदाय के घनश्याम केटव को वीर और फूलन देवी की वीरांगना की संज्ञा भी दी। कार्यक्रम में जयंती समारोह संयोजक पतिराखन निषाद ने कहा कि त्रेता मेें राम को मनाने आए भरत और अयोध्यावासियों को अपनी निषाद सेना से घेर कर गुह्य राज निषाद ने भरत से कहा था कि हमारे रहते वह राम का कुछ नहीं बिगाड़ सकते।
उन्होंने कहा कि सांसद विशंभर प्रसाद निषाद के प्रयास से 5 अप्रैल को गुह्य राज जयंती पर राज्य सरकार ने छुट्टी स्वीकृत की है। वक्ताआें ने निषाद समुदाय से शिक्षा, एकजुटता और सामाजिक पहचान बनाने के लिए जोर दिया। अध्यक्षता कर रहे शिवभूषण निषाद ने आभार जताया। संचालन राजबहादुर निषाद ने किया।
समारोह को चंद्रपाल कश्यप, देवी दयाल निषाद, लालेंद्र धुरिया, शोभाराम निषाद, छत्रपाल, इंद्रराज मांझी, फूलचंद्र, राजबहादुर, डॉ.मनीष और लल्लूराम ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम की शुरुआत में निषाद राज की प्रतिमा पर फूलों की माला चढ़ाई गई।