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पत्नी की हत्या में पति को पांच साल की कैद

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बांदा। ससुराल में युवती की मौत पर मां द्वारा दर्ज कराई गई हत्या की रिपोर्ट में अदालत ने पति को धारा 304 आईपीसी (2) का दोषी पाते हुए 5 वर्ष की कठोर कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। चार आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।
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अतर्रा थाना क्षेत्र के बल्लान गांव की गुलशन पत्नी मुन्ना खां ने 28 सितंबर 2015 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि ससुराल में उसकी बेटी शबनम की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। आरोप लगाया था कि दहेज में बाइक आदि मांगी जा रही है।
रिपोर्ट में पति ईशू उर्फ यूसुफ खां सहित ससुर रजा हुसैन, सास सोनिया, जेठ खालिक, देवर शब्बीर को नामजद किया। पुलिस ने तफ्तीश के बाद अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया। अभियोजन की ओर से 5 गवाह पेश किए गए।
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दोनों पक्षों की सुनवाई और सुबूत के आधार पर शनिवार को अपर जिला जज ने पति को धारा 304 का दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर एक माह की अतिरिक्त कैद होगी। अन्य को बरी कर दिया। अभियुक्तों की ओर से पैरवी फौजदारी के अधिवक्ता शंकर सिंह गौतम ने की।
पिता-पुत्र की हत्या के आरोप से बरी
बांदा। चोरी के इरादे से घर में घुसे बदमाशों से हुई भिड़ंत में पिता-पुत्र के हत्याभियुक्त तीनों आरोपी सुबूत के अभाव में अदालत से बरी हो गए। 16 वर्षों बाद अदालत से फैसला आया। मटौंध थाना क्षेत्र के अछरौड़ गांव में 23 मई 2004 की रात बउवा उर्फ सुनील गुप्ता के घर चोर घुसे थे।
आहट पाकर उसके पिता गणेशा (70) और पुत्र राजकिशोर (32) जाग गए और चोरों से भिड़ गए। चोरों के हमले में दोनों की मौत हो गई। अज्ञात लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज हुई। पुलिस ने तफ्तीश में गांव के ही बचनिया, रज्जन व मुन्नीलाल को अभियुक्त बनाते हुए धारा 459 व 460 आईपीसी में केस दर्ज किया। तफ्तीश के बाद आरोपपत्र दाखिल किया। अभियोजन की ओर से 14 गवाह पेश किए गए। शनिवार को अपर जिला जज ने तीनों आरोपियों को बरी कर दिया है। आरोपियों की पैरवी शंकर सिंह गौतम व ब्रजमोहन वाजपेयी ने की।
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