बेंदाघाट। कुरसेजा धाम में श्रीराम कथा के पांचवें
दिन मानस वक्ता विजय कौशल महराज (वृंदावन) ने राम वनगमन प्रसंग सुनाया।
गुरु की महिमा बताते हुए कहा कि बिना गुरु के मनुष्य का जीवन अधूरा है।
गुरुवार
को भी पंडाल श्रोताओं से खचाखच भरा रहा। कथा वाचक ने कहा कि वनगमन के समय
श्रीराम, लक्ष्मण और सीता जिस राह से गुजरते थे वहां विषैले जीव भी अपना
विष त्याग देते थे।
श्रीराम ने गुरु की आज्ञा के बिना कोई कार्य
नहीं किया। धनुष यज्ञ में भी गुरु को प्रणाम करने के बाद शिव धनुष तोड़ा।
जिस पर गुरु का हाथ नहीं होता वह विषय वासना में जल कर खाक हो जाता है।
लक्ष्मण
को श्रेष्ठ धर्माचार्य बताते हुए कहा कि दुर्भाग्य से आज के कुछ
धर्माचार्य अधर्म में लिप्त हैं। इसीलिए साधु-संतों पर टीका-टिप्पणी हो रही
हैं। बच्चों के आचरण के लिए भी उन्होंने माता-पिता को जिम्मेदार बताया।
गंगा
पार करते समय श्रीराम और केवट के बीच संवाद सुन श्रोता भाव विभोर हुए।
निषाद ने उतराई लेने से इनकार करते हुए कहा कि जैसे उन्हें गंगा पार किया
है उसी तरह श्रीराम उसे भव सागर से पार कर दें। राम के वन जाने के बाद दशरथ
मरण प्रसंग मार्मिक रहा।
आईजी आईटीबीपी राजाबाबू सिंह ने प्रेम व
सद्भाव का संदेश दिया। कुरसेजाधाम महंत परमेश्वर दास महराज, सुभाष बंसल
(दिल्ली), मोतीलाल गोयल, सोनू (जगदलपुर), अजय अग्निहोत्री (ग्वालियर), महेश
बांदिल, शिवगोपाल सिंह (लखनऊ), एसीजेएम रेलवे, भाजपा जिलाध्यक्ष इंद्रपाल
सिंह पटेल, अधिवक्ता राजेंद्र सिंह चौहान, राजेश द्विवेदी, कमलेश तिवारी
समेत चित्रकूट, कालपी, विदिशा, बलिया समेत दूर-दराज से आए श्रोता और संत
मौजूद रहे।