बांदा। घरेलू गैस सिलिंडर के दामों में 145 रुपये की एकमुश्त बढ़ोत्तरी से गृहणियां गुस्से में हैं। उन्हें अपने चौके का बजट डगमगाता नजर आ रहा है। कुछ ने तो कहा-कि क्या यही अच्छे दिन हैं? सिलिंडर की कीमत लगभग नौ सौ रुपये पहुंच जाने पर कुछ गृहणियों ने कहा कि अच्छे दिन तो नहीं आए, अलबत्ता लकड़ी कंडे वाले चूल्हे के दिन जरूर लौट रहे हैं।
उधर, मंगलवार की रात से लागू हुई नई दर से जिले के गैस उपभोक्ताओं पर लगभग एक लाख रुपये प्रतिदिन का अतिरिक्त बोझ पड़ा है, यानी करीब 30 लाख रुपये हर माह और गैस पर उडे़ंगे। अब तक यहां 750.50 रुपये में मिलता रहा रसोई गैस सिलिंडर (इंडेन) बृहस्पतिवार से 895 रुपये का हो गया है। जिन्हें सब्सिडी नहीं मिलती, उन्हें इस महंगाई की पूरी मार झेलनी होगी। अलबत्ता सब्सिडी वालों को हल्की चपत लगेगी। बांदा जिले में लगभग 38 गैस एजेंसियां हैं। इनके माध्यम से तकरीबन 1500 सिलिडर रोजाना खपत होती है। बांदा शहर में पांच एजेंसियों से लगभग 600 सिलिंडरों की रोजाना आपूर्ति होती है।
सिंकदरपुर (तिंदवारी) निवासी स्नेहा गुप्ता का कहना है घरेलू इस्तेमाल की चीजें लगातार महंगी हो रहीं हैं। रसोई गैस में इतनी बड़ी वृद्धि चौके का बजट गड़बड़ा देगी। सरकार पता नहीं कब महंगाई पर अंकुश लगाने पर ध्यान देगी।
गृहणी माया देवी (छोटी बाजार) के मुताबिक लगातार बढ़ रही कीमतों से घर का खर्च चलाना अब दूभर हो रहा है। पिछले कुछ साल में सिलिंडर की कीमत लगभग दोगुनी हो गई है। आमदनी घट रही है। कीमती बढ़ रही है।
गृहणी फूलवती (इंद्रानगर) की राय में भाजपा सरकार अपने अच्छे दिन लाने के वादे पर खरी नहीं उतर रही। गैस के दामों में महंगाई का सिलसिला थम नहीं रहा। लगभग नौ सौ रुपये का रसोई गैस सिलिंडर घर का बजट बिगाड़ देगा।
गृहणी पार्वती (खांईपार) का कहना है कि रसोई गैस सिलिंडर की कीमतों में 145 रुपये की बढ़ोत्तरी सुनकर मेरे तो होश उड़ गए। लगता है कि लकड़ी कंडे वाले चूल्हे के दिन फिर लौटेंगे। इस महंगाई में अच्छे दिन तो आएंगे नहीं।
गृहणी अर्चना यादव (ओरन) कहती हैं कि महंगाई के चलते घरेलू अर्थव्यवस्था पहले से ही डांवाडोल चल रही है। अब रसोई गैस की कीमतों में तकरीबन डेढ़ सौ रुपये की बढ़ोत्तरी ने परेशान कर दिया है। गरीब आदमी का जीना मुहाल है।
गृहणी रेखा यादव (बबेरू) के मुताबिक महंगाई के कारण वैसे ही लोग परेशान हैं। गैस सिलिंडर के दाम बढ़ने से परेशानी और बढ़ गई है। रसोई के खर्चों में कटौती करने के सिवाय और कोई चारा नहीं बचा है। गैस और संभालकर खर्च करेंगी।
गृहणी मंजू तिवारी (अतर्रा) गैस सिलिंडर में इतनी बड़ी वृद्धि से खफा हैं। वह कहती हैं कि इस सरकार ने तो हद कर दी। महिलाओं के लिए बड़ी-बड़ी बातें करने वाली सरकार उन्हीं पर सबसे ज्यादा बोझ डाल रही हैं। आमदनी कम हो रही है।
गृहणी ऊषा कचनेर (नरैनी) का कहना है कि महंगाई की सबसे ज्यादा मार चौके पर पड़ रही हैं। रोजमर्रा की हर वस्तु महंगी हो रही हैं। घरेलू गैस के दामों में नियंत्रण पर सरकार पूरी तरह नाकाम है। गैस के दाम बढ़ाकर अन्याय किया है।
Housewives upset due to increase in gas cylinder prices- फोटो : BANDA
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