फोटो - 02 घर में लगा पन्नी का तंबू और कार्य करतीं पीड़िता। संवाद
करतल। दैवीय आपदा का मुआवजा और आवास न मिलने से दंपती बच्चों के साथ पन्नी का तंबू बनाकर रहने को मजबूर हैं। पीड़ित ने बताया कि मुआवजा के लिए तहसील के चक्कर लगाकर थक चुके हैं। वहीं प्रशासन सिर्फ आश्वासन देकर दायित्वों की इतिश्री कर रहा है।
नरैनी ब्लाॅक के गोपरा गांव निवासी विनीता निषाद ने बताया कि अगस्त माह में हुई बारिश में उनका कच्चा मकान गिर गया था। कहा कि इसका राजस्व कर्मचारियों ने निरीक्षण कर सहायता राशि जारी कराने का आश्वासन दिया था लेकिन चार माह बाद भी कुछ न हो सका। उनके पति प्रकाश निषाद ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास सूची में नाम होने के बाद भी आज तक आवास के धनराशि नहीं मिली। बताया कि गिरे हुए घर में ही पन्नी का तंबू तानकर बच्चों को पाल-पोस रहे रहे हैं।
दिन तो किसी तरह कट जाता है लेकिन सर्द रातों में समस्या उठानी पड़ती है। ठंडी हवाओं के झोंकों से बच्चे बिलखते रहते हैं। बताया कि मुआवजा के लिए कई बार तहसील में संपर्क किया। वहां राजस्व निरीक्षक बजट न होने की बात कहते हैं। दंपती ने प्रशासन से सहायता राशि उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं इस संबंध में तहसीलदार नरैनी सतीश कुमार वर्मा ने कहा कि बजट की कोई कमी नहीं है। जांच कराकर पीड़ितों को सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी। संवाद