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घर-घर टीमें खोजेंगी टीबी और कुष्ठ रोगी

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मोबाइल टीम सदस्य को प्रमाणपत्र देते सीएमओ व अन्य स्वास्थ्य अधिकारी। - फोटो : BANDA
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बांदा। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की मोबाइल टीमें अब टीबी और कुष्ठ रोग के मरीजों को घर-घर खोजकर इसकी सूचना संबंधित विभागों को देंगी। उनकी निगरानी (स्क्रीनिंग) की जाएगी। टीबी खोज अभियान का पांचवां चरण 10 अक्तूबर से शुरू हो रहा है, जो 23 अक्तूबर तक चलेगा। इसके लिए 105 टीमें गठित की गई हैं। टीबी मरीज खोजने पर प्रति मरीज 200 रुपये टीम को अतिरिक्त मिलेंगे।
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सीएमओ डा.संतोष कुमार की अध्यक्षता में संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित हुई। इसमें ब्लाक स्तरीय टीमों को टीबी और कुष्ठ रोग की पहचान व लक्षण के बारे में बताया गया। सीएमओ ने बताया कि मोबाइल टीमें गांव-गांव जाकर टीबी और कुष्ठ (लेप्रोसी) रोगियों की अतिरिक्त स्क्रीनिंग करेंगी।
स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी बच्चों की स्क्रीनिंग करने के निर्देश टीमों को दिए हैं। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. बीपी वर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री ने वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने की मंशा जताई है। इसी के तहत इस माह सक्रिय रोगी खोज अभियान चलाया जा रहा है। शहरी क्षेत्रों के लिए 20 और ग्रामीण इलाकों के लिए 85 टीमें लगाई गई हैं। इनमें आशा, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य कार्यकर्ता शामिल हैं। उनके सुपरविजन को 21 सुपरवाइजर और 10 नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। बताया कि टीम के हर सदस्य को 150 रुपये प्रतिदिन दिए जाएंगे। टीबी मरीज की पुष्टि होने पर 200 रुपये प्रति मरीज अतिरिक्त दिया जाएगा।
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जिला कार्यक्रम समन्वयक प्रदीप वर्मा ने बताया कि अभियान में जिले की 2 लाख 10 हजार आबादी में सर्वे होना है। हर टीम रोजाना 50 घरों का सर्वे करेगी। टीबी का लक्षण पाए जाने पर बलगम के नमूने लेकर लैब में जांच को भेजे जाएंगे। टीबी की पुष्टि हुई तो 48 घंटे के अंदर मरीज को इलाज शुरू हो जाएगा। इलाज चलने के दौरान मरीज को निक्षय पोषण योजना के तहत 500 रुपये प्रति माह दिए जाएंगे। यह राशि खाते में सीधे आनलाइन भेजी जाएगी।
राज्यपाल की सलाह पर गोद लिए टीबी रोगी
कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में आईं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सभी से कहा था कि 18 साल तक के टीबी रोगियों को गोद लें। इसी श्रृंखला अब तक इस आयु के 163 रोगियों की सूची तैयार की गई हैं। इनमें 55 शहरी और शेष ग्रामीण हैं। स्वास्थ्य विभाग के 62 डाक्टरों ने इनको गोद ले लिया है। उधर, जिले में वर्ष 2018 में कुल 4168 टीबी के मरीज पाए गए। क्षय रोग विभाग का दावा है कि इनमें 85 फीसदी मरीजों का इलाज पूरा हो चुका है। चालू वर्ष 2019 में अब तक 2816 टीबी मरीज पाए गए हैं। इनका इलाज चल रहा है।
युवाओं में कुष्ठ रोग का ज्यादा खतरा
जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डा. एसपी द्विवेदी ने बताया कि शरीर पर दाग, धब्बे में सुन्नपन है तो कुष्ठ रोग का लक्षण हो सकता है। यह संक्रमण से फैलता है। इसका रोगी दिव्यांग भी हो सकता है। पुरुषों में यह ज्यादा फैलता है। 20 से 30 वर्ष आयु के लोग अधिक प्रभावित होते हैं। किशोरी और महिलाओं में कुष्ठ रोग की पहचान के लिए गांवों में नियुक्त आशा की मदद ली जा सकती है। उधर, आरबीएस प्रबंधक वीरेंद्र प्रताप ने बताया कि गठित टीमें रोजाना स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों की जांच करती हैं। बीमारी के लक्षण मिलने पर बच्चों को पीएचसी या सीएचसी भेजा जाता है। गंभीर मरीजों को इलाज के लिए बाहर भेजा जाता है।
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