फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मस्जिदों में तरावीह नहीं, घरों में इफ्तार

विज्ञापन
विज्ञापन
बांदा। मस्जिदों में नमाजियों की भीड़ नहीं है। जगह-जगह होने वाले सामूहिक इफ्तार भी नजर नहीं आए। रोजदारों ने ज्यादातर वक्त घरों में ही बिताया। अपने कुनबे के साथ घर में ही नमाजें अदा कीं। तिलावत की। बुधवार को रमजान के पहले रोजे का यही सीन था। नाइट कर्फ्यू और धर्मस्थलों में एक समय में पांच लोगों की एंट्री की पाबंदी ने रमजान माह की परंपरागत हलचल पर रोक लगा रखी है।
विज्ञापन

मंगलवार को शाम चांद नजर आने के बाद किसी भी मस्जिद में तरावीह के लिए पहले की तरह नमाजियों की हुजूम नजर नहीं आया। शहर की मुख्य नवाबी जामा मस्जिद के गेट पर डीएम द्वारा जारी आदेश/गाइड लाइन की नोटिस चस्पा कर दी गई। शाम को मगरिब की नमाज में मस्जिदों में एलान कर दिया गया कि तरावीह घरों पर ही पढ़ें। यही हुआ भी। उधर, बुधवार को तड़के सहरी के बाद पहला रोजा रखा गया। 42 डिग्री तापमान के बीच रोजदारों ने 14 घंटे से ज्यादा तक खाना-पीना पूरी तरह छोड़े रखा। शाम को सूरज ढलते ही इफ्तार घरों में ही किए गए। अधिकांश मस्जिदों में मात्र पांच लोग ही नमाज करते देखे गए। जामा मस्जिद में हर वर्ष होने वाला सामूहिक इफ्तार भी नहीं हुआ। मुतवल्ली डा.शेख सादी जमां ने बताया कि शासन की गाइडलाइन में सामूहिक खानपान पर भी रोक है।
-------------
इनसेट
-------
फोटो-14बीएनडीपी-4 : मौलाना अब्दुल जब्बार हशमती।
फोटो-14बीएनडीपी-5 : हाफिज एतबार अली।
घरों में इबादत करें, कोरोना से निजात मांगें
बबेरू। स्थानीय मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना अब्दुल जब्बार हशमती और जामा मस्जिद इमाम हाफिज एतबार अली ने मुस्लिम समाज से कहा है कि कोरोना बीमारी के मद्देनजर तरावीह और नमाज वगैरह इबादतें घर पर ही करें। गाइडलाइन पर पूरी तरह अमल करके खुद को और दूसरों को महफूज रखें। हरेक नमाज में मुल्क से कोरोना से निजात की दुआ करें। धर्मगुरुओं ने कहा कि प्रशासन की गाइड लाइन आम आदमी के हक में है।
विज्ञापन
विज्ञापन

-------------
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें