‘है राम के वजूद पर हिंदोस्तां को नाज, अहले नजर समझते हैं उनको इमामे हिंद’। दुनियां के मशहूर शायर अल्लामा इकबाल ने श्रीरामचंद्र को ‘इमामे हिंद’ की उपाधि दी थी। बुधवार को उनका जन्मोत्सव पूरे जोश-खरोश और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। इसकी पूर्व संध्या पर मंगलवार को ‘ख्वाजा हिंद’ (मुईनुद्दीन चिश्ती, अजमेर) का उर्स मनाया गया। इस संयोग को दोनों धर्मों के लोग पूरे सौहार्द के साथ मना रहे हैं।
श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम माना गया है। पूरी दुनियां में उन्हें लोग भगवान और महापुरुष के रूप में देखते हैं। चित्रकूट में उन्होंने 14 वर्ष का वनवास गुजारा। इससे यहां के लोगों का उनके प्रति और ज्यादा जुड़ाव है। दूसरी तरफ ख्वाजा हिंद कहे जाने वाले मुईनुद्दीन चिश्ती (अजमेरी) भी हिंदू-मुस्लिम में सम्मान और श्रद्धा की दृष्टि से देखे और माने जाते हैं। बड़ी तादाद में यहां से भी मुस्लिमों के अलावा हिंदू धर्मावलंबी अजमेर जाकर ख्वाजा की दरगाह पर माथा टेकते हैं। अबकी ख्वाजा का उर्स और श्रीराम का जन्मोत्सव लगभग एक साथ होने से सांप्रदायिक सौहार्द के संदेश को और पंख लगे हैं। दोनों ही धर्मों के गुरुओं और बुजुर्गों ने इस नायाब और दुर्लभ संयोग को मिलजुलकर सौहार्दपूर्ण और सांप्रदायिक सद्भाव के बीच मनाने की अपील की है।